नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित विट्ठलभाई पटेल हाउस में तीसरे दौर की अहम बैठक हुई। दोनों पक्षों ने विवाद का समाधान निकालने के उद्देश्य से तटस्थ स्थान पर बातचीत की।
इससे पहले CJP ने मंत्रियों के सरकारी आवास या कार्यालय में बैठक करने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया था कि बातचीत केवल न्यूट्रल वेन्यू पर ही होगी।
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
सरकार की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह बैठक में शामिल हुए। वहीं CJP का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास, आशुतोष रंका और एक अन्य युवा प्रतिनिधि ने किया।
इससे पहले 20 जुलाई को भी दोनों पक्षों के बीच दो दौर की बातचीत हो चुकी थी।
सोनम वांगचुक के अनशन खत्म होने के बाद हुई चर्चा
यह बैठक सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा अपना 26 दिनों से जारी अनशन समाप्त करने के कुछ घंटों बाद हुई। सरकार से मिले आश्वासन के बाद उनके अनशन खत्म होने के तुरंत बाद CJP और सरकार के बीच वार्ता होने से इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर मांगा गया समय
बैठक के बाद CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने मीडिया से बातचीत में बताया कि सरकार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर विचार करने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस विषय पर जल्द फैसला ले सकती है।
किन मांगों पर बनी सहमति?
CJP के अनुसार, सरकार ने दो प्रमुख मांगों पर सैद्धांतिक सहमति जताई है—
- आंदोलन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर एवं कानूनी मामलों को वापस लेने पर सकारात्मक रुख।
- नीट परीक्षा विवाद से प्रभावित और आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर सहमति।
हालांकि इन मुद्दों पर अंतिम निर्णय की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
CJP की प्रमुख मांगें
CJP ने स्पष्ट किया है कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन समाप्त नहीं होगा।
संगठन की प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।
- प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय करना।
- देश की परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार।
- नीट पेपर लीक से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा।
- आंदोलन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर और कानूनी कार्रवाई वापस लेना।
अब सभी की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी है, जिससे इस आंदोलन की आगे की दिशा तय हो सकती है।