रायपुर: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। NEET पेपर लीक मामले को लेकर लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच आए इस फैसले पर सत्ता और विपक्ष के नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे छात्रों और युवाओं की जीत बताया, जबकि प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा वापस लेना चाहिए। वहीं विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हालात को देखते हुए यह फैसला आवश्यक था।
भूपेश बघेल बोले- यह युवाओं की जीत
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर के छात्रों के संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि युवाओं ने अपनी एकजुटता दिखाई है और उनकी आवाज सुनी गई।
अपने बयान में भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए राजनीतिक टिप्पणी की और छात्रों के आंदोलन को ऐतिहासिक बताया।
रमन सिंह ने फैसले को बताया जरूरी
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जिस मुद्दे को लेकर पूरे देश में विवाद था, उस पर सरकार ने निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए और भी कड़े कानून बनाए जाएंगे, ताकि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
गजेंद्र यादव बोले- मंत्री को नहीं देना चाहिए था इस्तीफा
प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने अलग राय रखते हुए कहा कि इतने बड़े मंत्रालय में हजारों अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। यदि कहीं कोई चूक होती है तो उसके लिए सीधे मंत्री को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब जांच के लिए समिति गठित हो चुकी है और फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था भी की गई है, तो ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। उन्होंने देशहित में उनका इस्तीफा वापस लेने की अपील की।
छात्र संगठनों ने निकाली विजय रैली
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बिलासपुर और रायपुर में छात्र संगठनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विजय रैली निकाली। इस दौरान छात्रों ने “छात्र एकता जिंदाबाद” और “NTA रद्द करो” जैसे नारे लगाए।
छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
पेपर लीक रोकने के लिए लागू है सख्त कानून
केंद्र सरकार ने 21 जून 2024 से सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया था। इस कानून के तहत—
- पेपर लीक और परीक्षा में धांधली को गैर-जमानती अपराध बनाया गया है।
- पेपर लीक या नकल कराने पर 3 से 5 वर्ष की जेल और ₹10 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है।
- परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था के अधिकारियों की संलिप्तता मिलने पर 3 से 10 वर्ष तक की सजा और ₹1 करोड़ तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

