कांकेर। छत्तीसगढ़ के चर्चित मनरेगा घोटाले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व जिला पंचायत CEO सहित 8 अधिकारियों के खिलाफ विशेष अदालत में करीब 6,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। मामला वर्ष 2006-07 और 2007-08 के दौरान कथित तौर पर ₹1.69 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है।
8 ग्राम पंचायतों की खरीदी में अनियमितता का आरोप
EOW की जांच के अनुसार, मनरेगा के तहत 8 ग्राम पंचायतों के लिए सामग्री खरीद में करीब ₹1.69 करोड़ (₹1,69,14,247) की कथित वित्तीय गड़बड़ी हुई। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत, कांकेर में चार्जशीट पेश की गई।
जिला स्तर से कराई गई थी केंद्रीकृत खरीदी
जांच एजेंसी के मुताबिक तत्कालीन जिला पंचायत CEO केपी देवांगन ने नियमों के विपरीत जिला स्तर पर ही सामग्री की केंद्रीकृत खरीदी कराई। जबकि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार यह अधिकार संबंधित जनपद पंचायतों और ग्राम पंचायतों के पास होना चाहिए था।
जांच में फ्लेक्सी बोर्ड, मस्टर रोल दस्तावेज, रोजगार गारंटी योजना की गाइडलाइन, रोजगार रजिस्टर, फाइल कवर और अन्य सामग्री की खरीद में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई है।
किन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई?
EOW ने चार्जशीट में तत्कालीन जिला पंचायत CEO केपी देवांगन के अलावा सात तत्कालीन जनपद पंचायत CEO को भी आरोपी बनाया है। इनमें—
- राधाकांत कर (कांकेर)
- गोवर्धन गजबल्ला (नरहरपुर)
- परदेशी राम मरकाम (चारामा)
- भारत राम नेताम (अंतागढ़)
- रामकिशुन ध्रुव (कोयलीबेड़ा)
- जी.आर. ठाकुर (भानुप्रतापपुर)
- संवालदास बघेल (दुर्गकोंदल)
शामिल हैं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि सभी अधिकारियों ने कथित रूप से मिलीभगत कर निविदा और सरकारी खरीद नियमों का उल्लंघन किया तथा सरकारी धन के उपयोग में अनियमितता बरती।
इन धाराओं के तहत मामला दर्ज
EOW ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-B (षड्यंत्र), 409 (आपराधिक न्यासभंग) और 420 (धोखाधड़ी) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है।
मुख्य आरोपी पर पहले से भी दर्ज हैं मामले
EOW के अनुसार, तत्कालीन जिला पंचायत CEO केपी देवांगन के खिलाफ भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़े दो अन्य मामले पहले से लंबित हैं।
- 2009 के मामले में चयन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी कर अपात्र अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने का आरोप है।
- 2010 के मामले में खरीद नियमों के उल्लंघन और ₹8.44 करोड़ से अधिक की शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग का आरोप है।
इन दोनों मामलों में भी EOW पहले ही अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुका है।