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राम मंदिर में बढ़ा चढ़ावा, ट्रस्ट का बड़ा फैसला: अब 8 घंटे होगी कर्मचारियों की ड्यूटी

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Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती भीड़ के साथ भगवान रामलला को मिलने वाले चढ़ावे में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। बढ़ते दान और कार्यभार को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों की ड्यूटी 6 घंटे से बढ़ाकर 8 घंटे करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव का उद्देश्य दान की गिनती, रिकॉर्ड और बैंकिंग प्रक्रिया को समय पर पूरा करना है।

बढ़ते चढ़ावे के चलते लिया गया फैसला

राम मंदिर में हर दिन देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इसके चलते दानपात्रों में नकद राशि, ऑनलाइन दान और अन्य अर्पण लगातार बढ़ रहे हैं। ट्रस्ट का कहना है कि पहले की तुलना में चढ़ावे की मात्रा काफी बढ़ गई है, इसलिए उसकी गिनती और लेखा-जोखा पूरा करने में अधिक समय लग रहा है।

समय पर होगी गिनती और रिकॉर्ड तैयार

नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों को प्रतिदिन 8 घंटे तक काम करना होगा। इससे चढ़ावे की गिनती, राशि का सत्यापन, रिकॉर्ड तैयार करना और बैंक में जमा कराने जैसी प्रक्रियाएं अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सकेंगी। ट्रस्ट का मानना है कि इससे पूरी व्यवस्था और अधिक पारदर्शी बनेगी।

श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी

राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से अयोध्या में श्रद्धालुओं का आगमन लगातार बढ़ रहा है। खासकर त्योहारों, छुट्टियों और सप्ताहांत पर लाखों श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसके साथ ही मंदिर में मिलने वाले दान और चढ़ावे में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

सिर्फ गिनती नहीं, कई जिम्मेदारियां निभाते हैं कर्मचारी

चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों का काम केवल नकदी गिनना नहीं होता। उन्हें प्राप्त राशि का सत्यापन, पूरा रिकॉर्ड तैयार करना, बैंक में सुरक्षित जमा कराना और सभी वित्तीय दस्तावेजों का सही रखरखाव भी करना पड़ता है। बढ़े हुए कार्य समय से इन सभी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाने में मदद मिलेगी।

पारदर्शी व्यवस्था बनाए रखना ट्रस्ट की प्राथमिकता

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का पूरी पारदर्शिता के साथ लेखा-जोखा रखना उनकी प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से कर्मचारियों की ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया गया है, ताकि बढ़ते चढ़ावे के बावजूद सभी प्रक्रियाएं समय पर और व्यवस्थित ढंग से पूरी हो सकें।

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