बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गुरुवार को शिक्षा और प्रशासन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण मामलों में अहम टिप्पणियां और फैसले सुनाए। अदालत ने मिड-डे मील योजना में जिलों के बीच असमानता पर राज्य सरकार से जवाब मांगा, शिक्षाकर्मियों की पेंशन को लेकर बड़ा फैसला दिया और विभागीय परीक्षा में अनियमितता पाए जाने पर उसका परिणाम रद्द कर दिया।
मिड-डे मील योजना पर हाईकोर्ट सख्त
सरकारी स्कूलों में संचालित प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (मिड-डे मील) योजना को लेकर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से सवाल पूछा कि जब बच्चों को बेहतर पोषण देने के लिए सप्ताह में तीन दिन 20 ग्राम मिलेट चिक्की (बाजरा, कोदो-कुटकी) देने का निर्णय लिया गया है, तो यह व्यवस्था केवल सात जिलों तक ही सीमित क्यों है। अदालत ने पूछा कि शेष 26 जिलों के बच्चों को इस सुविधा से वंचित रखने का आधार क्या है।
मीडिया रिपोर्ट के बाद स्वतः संज्ञान
मिड-डे मील योजना में गड़बड़ियों और खराब व्यवस्थाओं से जुड़ी लगातार सामने आ रही खबरों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज कर सुनवाई शुरू की गई। अदालत ने पूरे मामले की जांच के लिए एक न्यायमित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किया है, जिन्हें स्कूलों में मिड-डे मील की वास्तविक स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
सिर्फ सात जिलों में मिल रही मिलेट चिक्की
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र ने मुख्य सचिव द्वारा दायर शपथपत्र का हवाला देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने स्वीकार किया है कि 20 ग्राम मिलेट चिक्की का वितरण फिलहाल केवल नियद नेल्लानार योजना के पांच जिलों के साथ जशपुर और रायगढ़ सहित कुल सात जिलों में ही किया जा रहा है।
शिक्षाकर्मियों की पेंशन पर बड़ी राहत
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शिक्षाकर्मियों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की रिट अपील खारिज कर दी। मामला शिक्षाकर्मी से शिक्षक (एलबी) बने कर्मचारियों की संविलियन से पहले की सेवा अवधि को पेंशन के लिए मान्यता देने से जुड़ा था।
अदालत ने सिंगल बेंच के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें राज्य सरकार को पूर्व सेवा अवधि को पेंशन पात्रता में शामिल करने के विषय पर पुनर्विचार कर स्पष्ट नीति बनाने के निर्देश दिए गए थे।
विभागीय परीक्षा का परिणाम रद्द
छत्तीसगढ़ अधीनस्थ लेखा सेवा विभागीय परीक्षा (भाग-दो) 2017 को लेकर भी हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने परीक्षा का परिणाम निरस्त कर दिया।
कोर्ट ने पाया कि परीक्षा में विज्ञापित पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न पूछे गए थे और परीक्षा से ठीक पहले एडमिट कार्ड जारी करते समय नया विषय भी जोड़ दिया गया था। अदालत ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए वित्त विभाग को निर्देश दिया कि पहले स्पष्ट और निर्धारित सिलेबस अधिसूचित किया जाए, अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया जाए और उसके बाद नई परीक्षा आयोजित की जाए।
इन तीनों मामलों में हाईकोर्ट की टिप्पणियां और आदेश राज्य की शिक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों के अधिकारों और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।