पाकिस्तान के अशांत और संसाधन समृद्ध प्रांत बलूचिस्तान से एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहाँ एक कोयला खदान के भीतर जहरीली मीथेन गैस के खतरनाक स्तर पर जमा होने के कारण अचानक जोरदार धमाका हो गया। विस्फोट इतना भीषण था कि खदान का एक बड़ा हिस्सा ढह गया और वहाँ काम कर रहे कई मजदूरों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
घटना के वक्त खदान की गहराई में कई मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें से दर्जनों खनिक अभी भी मलबे और जहरीली गैस के गुबार के बीच सैकड़ों फीट नीचे फंसे हुए हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत मौके पर पहुँच गई हैं और मलबे को हटाकर फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर राहत अभियान चलाया जा रहा है।
मीथेन गैस का रिसाव बना धमाके की मुख्य वजह
प्रांतीय अधिकारियों और खान विभाग के शुरुआती जांच में सामने आया है कि खदान के भीतर सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण मीथेन गैस का निरंतर रिसाव हो रहा था। उचित वेंटिलेशन न होने की वजह से खदान के निचले हिस्से में गैस का अत्यधिक दबाव बन गया, जिसने एक बड़े विस्फोट का रूप ले लिया।
धमाका होते ही खदान की मुख्य सुरंग और छत धंस गई, जिससे खदान में प्रवेश करने और बाहर निकलने के सभी रास्ते पूरी तरह अवरुद्ध हो गए। खदान के अंदर मौजूद मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए।
जहरीली गैस और अंधेरे के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी रुकावट
घटनास्थल पर पहुंचे बचाव कर्मियों को राहत कार्य चलाने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। खदान के भीतर लगातार जहरीली गैस का रिसाव होने के कारण रेस्क्यू टीमों को विशेष ऑक्सीजन मास्क और आधुनिक उपकरणों के सहारे ही अंदर भेजा जा रहा है।
बचाव दल लगातार जहरीली गैस को बाहर निकालने के लिए ब्लोअर और पंखों का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि अंदर फंसे मजदूरों तक ताजी हवा पहुँचाई जा सके। खदान के बाहर मजदूरों के परिजनों और सहकर्मियों की भारी भीड़ जमा है, जो अपनों की कुशलता की खबर पाने के लिए रो-रोकर प्रार्थना कर रहे हैं।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और खदान मालिकों की लापरवाही पर फूटा गुस्सा
बलूचिस्तान में कोयला खदानों में इस तरह के जानलेवा हादसे पहले भी कई बार घटित हो चुके हैं। स्थानीय माइन्स लेबर यूनियन ने इस भयावह हादसे के बाद प्रांतीय सरकार और खदान मालिकों की कड़ी निंदा की है। यूनियनों का आरोप है कि खदानों में काम करने वाले मजदूरों को न तो पर्याप्त सुरक्षा किट दी जाती है और न ही खदानों में गैस सेंसर लगाए जाते हैं।
निजी खदान मालिक सिर्फ मुनाफे पर ध्यान देते हैं और गरीब मजदूरों की जान को जोखिम में डालते हैं। श्रमिक संगठनों ने मांग की है कि हादसे के जिम्मेदार ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।