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एथेनॉल ब्लेंडिंग से पेट्रोल पर ₹30 प्रति लीटर तक की बचत का दावा, सरकार बोली- नहीं होती मिश्रण व्यवस्था तो दिल्ली में ₹125 लीटर पहुंच सकता था दाम

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दावा किया है कि पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग (मिश्रण) के कारण उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में बड़ी राहत मिली है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दौरान एथेनॉल मिश्रण नहीं किया गया होता, तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग ₹125 प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। मंत्रालय का कहना है कि इस व्यवस्था से संकट के समय उपभोक्ताओं को करीब ₹30 प्रति लीटर तक की राहत मिली।

सरकार ने क्या कहा?

पेट्रोलियम मंत्रालय ने एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि इस योजना ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का असर घरेलू उपभोक्ताओं पर कम किया।

मंत्रालय के अनुसार, पहले से तय कीमतों पर खरीदे गए घरेलू एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाए जाने के कारण खुदरा कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिली।


दिल्ली में क्या हैं मौजूदा कीमतें?

सरकारी जानकारी के अनुसार—

  • E20 (20% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल की कीमत दिल्ली में ₹102.12 प्रति लीटर है।
  • वहीं 100 ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत ₹169 प्रति लीटर बताई गई है।

मंत्रालय का कहना है कि यदि एथेनॉल ब्लेंडिंग नहीं होती, तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर सीधे पेट्रोल की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता था।


खाद्यान्न डायवर्ट करने के आरोपों पर सरकार का जवाब

सरकार ने उन आरोपों को भी खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि गरीबों के लिए उपलब्ध खाद्यान्न या भारतीय खाद्य निगम (FCI) के सब्सिडी वाले चावल का उपयोग एथेनॉल उत्पादन के लिए किया जा रहा है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम के लिए FCI के सब्सिडी वाले चावल का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।


माइलेज पर क्या पड़ता है असर?

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ARAI, SIAM और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि—

  • E10 ईंधन के लिए डिजाइन की गई BS-III, BS-IV और BS-VI पेट्रोल गाड़ियों में यदि E20 ईंधन का उपयोग किया जाता है, तो परिस्थितियों और वाहन के प्रकार के अनुसार ईंधन दक्षता (माइलेज) में लगभग 2 से 6 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।

इससे पहले सरकार ने संसद में बताया था कि अधिकांश मामलों में यह कमी लगभग 3 से 5 प्रतिशत के बीच देखी गई है।


वैज्ञानिक परीक्षण के बाद लागू हुई व्यवस्था

सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को वैज्ञानिक परीक्षणों और चरणबद्ध प्रक्रिया के बाद लागू किया गया है।

सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, E20 ईंधन को लागू करने से पहले—

  • इंजन की कार्यक्षमता,
  • फ्यूल सिस्टम,
  • मैटेरियल कम्पैटिबिलिटी,
  • ड्राइविंग प्रदर्शन,
  • और उत्सर्जन (Emission)

से जुड़े सभी पहलुओं का परीक्षण किया गया था।


करोड़ों वाहन कर रहे हैं इस्तेमाल

सरकार के अनुसार, देश में वर्तमान में—

  • 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन
  • 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें

एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रही हैं।

सरकार का दावा है कि अब तक एथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण इंजन खराब होने का कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है।

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