सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 788 अंक की बढ़त के साथ खुला, जबकि निफ्टी 189 अंक चढ़कर हरे निशान में कारोबार करता दिखा। बेहतर वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
इन वजहों से बाजार में लौटी तेजी
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार को मजबूती मिलने के पीछे कई अहम कारण रहे—
- वैश्विक शेयर बाजारों से सकारात्मक संकेत
- कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
- बड़ी कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे
- निवेशकों की सकारात्मक धारणा
अब बाजार की नजर इस सप्ताह होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर है। ब्याज दरों और केंद्रीय बैंक के रुख से आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय हो सकती है।
आज से F&O में लागू हुआ बड़ा बदलाव
3 अगस्त से शेयर बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) से जुड़े शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (Closing Auction Session – CAS) लागू हो गया है।
SEBI और स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा लागू की गई इस नई व्यवस्था का उद्देश्य शेयरों की क्लोजिंग प्राइस को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है। साथ ही अंतिम मिनटों में संभावित हेरफेर की आशंका को कम करना और बेहतर प्राइस डिस्कवरी सुनिश्चित करना भी इसका लक्ष्य है।
अब कैसे तय होगी क्लोजिंग प्राइस?
पहले F&O शेयरों की क्लोजिंग प्राइस कारोबार के अंतिम चरण में हुए सौदों के VWAP (Volume Weighted Average Price) के आधार पर तय होती थी।
नई व्यवस्था के तहत दोपहर 3:15 बजे के बाद खरीद और बिक्री के ऑर्डर एकत्र किए जाएंगे और उन्हें एक संतुलित मूल्य पर मैच किया जाएगा। यही कीमत संबंधित शेयर की आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस मानी जाएगी।
इस प्रक्रिया से किसी एक बड़े ऑर्डर का अंतिम कीमत पर प्रभाव कम होगा और बाजार में अधिक पारदर्शिता आएगी।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि नया क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम—
- क्लोजिंग प्राइस को अधिक पारदर्शी बनाएगा।
- डेरिवेटिव्स बाजार में बेहतर मूल्य निर्धारण में मदद करेगा।
- अंतिम समय में कीमतों में हेरफेर की संभावना कम करेगा।
- कैश और F&O बाजार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करेगा।
इस सप्ताह इन घटनाओं पर रहेगी बाजार की नजर
आने वाले दिनों में निवेशकों की निगाहें इन प्रमुख कारकों पर रहेंगी—
- RBI की MPC बैठक और ब्याज दरों का फैसला
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीद-बिक्री
- वैश्विक बाजारों की चाल
- कच्चे तेल की कीमतें
- कंपनियों के तिमाही नतीजे
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक संकेत सकारात्मक बने रहे और RBI की ओर से बाजार के अनुकूल संकेत मिले, तो घरेलू शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।