नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। पहली नजर में यह प्रदर्शन बर्मिंघम 2022 के 61 पदकों से कमजोर लग सकता है, लेकिन परिस्थितियों को देखें तो ग्लासगो अभियान भारत के सबसे प्रभावशाली अभियानों में गिना जाएगा।
कम खेल, कम खिलाड़ी… फिर भी टॉप-4
इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में केवल 10 खेल शामिल किए गए, जबकि 2022 में 19 खेल खेले गए थे। भारत के सबसे सफल खेल शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और क्रिकेट कार्यक्रम का हिस्सा ही नहीं थे।
इसी कारण भारत का सबसे बड़ा मेडल बैंक पहले से ही बाहर हो गया था। इसके बावजूद भारतीय टीम चौथे स्थान तक पहुंचने में सफल रही।
123 खिलाड़ियों ने किया कमाल
बर्मिंघम में भारत ने करीब 210 खिलाड़ियों का दल भेजा था, जबकि इस बार केवल 123 खिलाड़ी ग्लासगो पहुंचे। इनमें से 38 खिलाड़ियों ने पदक जीते, यानी लगभग 31% सफलता दर, जो पिछले संस्करण से बेहतर रही।
बॉक्सिंग बनी भारत की सबसे बड़ी ताकत
भारत के 39 पदकों में सबसे बड़ा योगदान बॉक्सिंग का रहा।
- 10 पदक
- 7 गोल्ड
- 3 सिल्वर
महिला मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच स्वर्ण पदक जीते, जबकि पुरुष वर्ग से भी दो गोल्ड आए।
जूडो ने रचा इतिहास
भारतीय जूडो टीम ने पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में दो स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
- अस्मिता डे – गोल्ड
- हर्ष सिंह – गोल्ड
- यामिनी मौर्य – सिल्वर
- उन्नति शर्मा – ब्रॉन्ज
एथलेटिक्स में नई पीढ़ी का दम
हालांकि एथलेटिक्स में भारत को कोई गोल्ड नहीं मिला, लेकिन कई खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया।
- नीरज चोपड़ा – सिल्वर
- गुलवीर सिंह – दो पदक
- तेजस्विन शंकर – डेकाथलॉन में ऐतिहासिक पदक
- श्रीशंकर, प्रवीण चित्रावेल, सर्वेश कुशारे और अन्य खिलाड़ियों ने भी पदक जीते।
पैरा स्पोर्ट्स ने बढ़ाई उम्मीदें
भारतीय पैरा एथलीटों ने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए कई पदक जीतकर साबित किया कि अब यह भारत का मजबूत मेडल बैंक बन चुका है।
मीराबाई चानू का सुनहरा रिकॉर्ड
वेटलिफ्टिंग में भारत ने 8 पदक जीते। मीराबाई चानू ने लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ स्वर्ण जीतकर नया इतिहास रचा।
अगर शूटिंग और कुश्ती होती…
बर्मिंघम 2022 में भारत को केवल इन छह खेलों से 30 पदक मिले थे। यदि वे खेल इस बार भी शामिल होते, तो भारत के 60 से अधिक पदक जीतने की पूरी संभावना थी।
भारत के पांच सबसे बड़े स्टार
- मीराबाई चानू – लगातार तीसरा गोल्ड
- भारतीय बॉक्सिंग टीम – 10 पदक
- गुलवीर सिंह – एक संस्करण में दो पदक
- हर्ष सिंह और अस्मिता डे – जूडो में ऐतिहासिक गोल्ड
- भारतीय पैरा एथलीट – रिकॉर्ड प्रदर्शन
एक नजर में भारत का प्रदर्शन
| श्रेणी | प्रदर्शन |
|---|---|
| कुल पदक | 39 |
| स्वर्ण | 13 |
| रजत | 17 |
| कांस्य | 9 |
| रैंक | चौथा |
| खिलाड़ी | 123 |
| पदक विजेता | 38 |
| सफलता दर | 31% |
| सबसे सफल खेल | बॉक्सिंग (10 पदक) |
क्या संकेत देता है यह प्रदर्शन?
ग्लासगो 2026 ने दिखाया कि भारत अब केवल शूटिंग और कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों पर निर्भर नहीं है। बॉक्सिंग, जूडो, एथलेटिक्स और पैरा स्पोर्ट्स में बढ़ती गहराई भारतीय खेलों के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
2030 में प्रस्तावित अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स को देखते हुए यह प्रदर्शन भारत के लिए बेहद सकारात्मक माना जा रहा है।