दुर्ग। दुर्ग जिले में करोड़ों रुपये की जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में कांग्रेस नेत्री एवं भिलाई नगर निगम की एमआईसी सदस्य रीता सिंह, उनके पति रमेश चंद्र सिंह और बेटे मानवचंद सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। यह कार्रवाई पाटन स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की अदालत के निर्देश पर उतई थाना पुलिस ने की है।
मामला रायपुर निवासी बीपी सिंह की निजी शिकायत पर दर्ज हुआ। अदालत ने प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला मानते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने और 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है।
4.50 करोड़ में तय हुआ था जमीन का सौदा
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2024 में छांटा स्थित गिट्टी खदान और उससे लगी करीब 25 एकड़ जमीन का सौदा 4 करोड़ 50 लाख रुपये में तय हुआ था। इस सौदे में एक चैन मशीन और दो हाइवा वाहन भी शामिल बताए गए थे।
शिकायतकर्ता का दावा है कि कुल 25 एकड़ में से केवल 13 एकड़ जमीन आरोपियों के स्वामित्व में थी, जबकि 7 एकड़ दान की भूमि और 5 एकड़ सरकारी लीज की जमीन को भी सौदे का हिस्सा बताकर प्रस्तुत किया गया।
चेक से किए गए करोड़ों रुपये के भुगतान
शिकायत में कहा गया है कि कुल 4 करोड़ 39 लाख रुपये चेक के माध्यम से आरोपियों को दिए गए।
- 2.90 करोड़ रुपये मानवचंद सिंह के खाते में,
- 1 करोड़ रुपये रीता सिंह के खाते में,
- शेष राशि रमेश चंद्र सिंह के खाते में जमा कराई गई।
आरोप है कि पूरी रकम मिलने के बाद भी केवल 7 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कराई गई, जबकि शेष भूमि का न तो नामांतरण हुआ और न ही सौदे की अन्य शर्तें पूरी की गईं।
फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि दस्तावेजों की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। उनके अनुसार, जिन लोगों को जमीन का मालिक बताकर सौदा किया गया, वे वास्तविक मालिक नहीं थे।
यह भी आरोप लगाया गया है कि तीनों आरोपियों ने मिलकर फर्जी इकरारनामा और अन्य दस्तावेज तैयार किए, जिनमें वास्तविक भूमि मालिकों के बजाय अन्य लोगों के हस्ताक्षर कराए गए और गलत जानकारी के आधार पर करोड़ों रुपये का सौदा किया गया।
15 दिनों में पुलिस को देनी होगी रिपोर्ट
अदालत ने उतई थाना पुलिस को संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के साथ 15 दिनों के भीतर अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है।
जांच के दौरान पुलिस जमीन के वास्तविक मालिकाना हक, दस्तावेजों की वैधता, बैंक लेनदेन और पूरे सौदे से जुड़े सभी तथ्यों की जांच करेगी।
नोट: यह मामला फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस जांच के अधीन है। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय जांच और न्यायालय की कार्यवाही के बाद ही होगा।