नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में कारोबारी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने जमानत के साथ कई सख्त शर्तें भी लगाई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक अनवर ढेबर छत्तीसगढ़ में नहीं रहेंगे। साथ ही उन्हें अपना वर्तमान पता और मोबाइल नंबर संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रायल के दौरान जब भी कोर्ट उन्हें तलब करेगी, अनवर ढेबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
सुनवाई के दौरान अनवर ढेबर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पक्ष रखा, जबकि छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने पैरवी की।
गवाहों को प्रभावित करने की आशंका पर लगी शर्त
राज्य सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि यदि अनवर ढेबर छत्तीसगढ़ में रहते हैं, तो गवाहों को प्रभावित करने की आशंका बनी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को ध्यान में रखते हुए उन्हें राज्य से बाहर रहने की शर्त के साथ अंतरिम जमानत प्रदान की। अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित जांच एजेंसियों को उनका वर्तमान पता और संपर्क नंबर उपलब्ध कराया जाए।
हाईकोर्ट पहले कर चुका था जमानत खारिज
इससे पहले 13 मई को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध रिकॉर्ड से राज्य सरकार के निगम में एक संगठित भ्रष्टाचार तंत्र के संचालन के संकेत मिलते हैं।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि सार्वजनिक धन से जुड़े आर्थिक अपराध सामान्य अपराधों की तुलना में अधिक गंभीर होते हैं और ऐसे मामलों में जमानत पर विचार करते समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है।
क्या है CSMCL मामला?
यह मामला आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि CSMCL में कथित रूप से ऐसा तंत्र काम कर रहा था, जिसमें मैनपावर सप्लाई एजेंसियों से उनके वैध बिलों और बकाया भुगतान को मंजूरी दिलाने के बदले अवैध कमीशन लिया जाता था।
जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई एजेंसियों को भुगतान जारी कराने के लिए कथित तौर पर कमीशन देने के लिए मजबूर किया जाता था।
इसी मामले में अनवर ढेबर सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।
शराब घोटाले में भी आरोपी
अनवर ढेबर का नाम छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में भी प्रमुख आरोपियों में शामिल है। इसके अलावा उनके खिलाफ अन्य मामलों में भी जांच जारी है।
ED कर चुकी है संपत्तियां अटैच
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए अनवर ढेबर से जुड़ी रायपुर स्थित जमीनों सहित कई संपत्तियों को अटैच किया था।
ED का दावा है कि ये संपत्तियां कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन से जुड़ी हुई हैं। जांच एजेंसी इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी अदालत में दाखिल कर चुकी है और जांच अभी जारी है।