बीते कारोबारी सप्ताह में देश की सबसे मूल्यवान 10 कंपनियों में से 4 कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में कुल करीब ₹1.43 लाख करोड़ की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे बड़ा गेनर रहा। बैंक की मार्केट वैल्यू में करीब ₹63,922 करोड़ का इजाफा हुआ।
मार्केट कैप बढ़ाने वाली चार कंपनियों में SBI, रिलायंस इंडस्ट्रीज, TCS और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) शामिल रहीं।
SBI की मार्केट वैल्यू सबसे ज्यादा बढ़ी
सप्ताह के दौरान SBI के मार्केट कैप में ₹63,922.03 करोड़ की सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई। इस उछाल के बाद बैंक का कुल मार्केट कैप बढ़कर करीब ₹10.12 लाख करोड़ हो गया।
इस प्रदर्शन के साथ SBI टॉप-10 कंपनियों में सबसे बड़ा मार्केट-कैप गेनर रहा।
रिलायंस की वैल्यू में ₹32,816 करोड़ का इजाफा
रिलायंस इंडस्ट्रीज के मार्केट कैप में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। कंपनी की मार्केट वैल्यू ₹32,816.40 करोड़ बढ़कर करीब ₹18.02 लाख करोड़ हो गई।
इसके अलावा TCS के मार्केट कैप में ₹31,875.35 करोड़ की वृद्धि हुई। इसके बाद कंपनी की कुल मार्केट वैल्यू करीब ₹8.87 लाख करोड़ पहुंच गई।
वहीं L&T का मार्केट कैप ₹14,637.76 करोड़ बढ़कर ₹5,56,482.45 करोड़ हो गया।
LIC समेत 6 कंपनियों की वैल्यू घटी
जहां चार कंपनियों ने बाजार में बढ़त हासिल की, वहीं टॉप-10 में शामिल बाकी 6 कंपनियों के मार्केट कैप में कुल करीब ₹1.23 लाख करोड़ की गिरावट दर्ज की गई।
इन कंपनियों में भारती एयरटेल, HDFC बैंक, ICICI बैंक, बजाज फाइनेंस, LIC और हिंदुस्तान यूनिलीवर शामिल हैं।
इनमें LIC को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। यानी सप्ताह के दौरान कंपनी के मार्केट कैप में टॉप-10 कंपनियों के बीच सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली।
आखिर मार्केट कैपिटलाइजेशन होता क्या है?
मार्केट कैपिटलाइजेशन यानी मार्केट कैप किसी कंपनी के बाजार में मौजूद कुल शेयरों की मौजूदा कीमत के आधार पर निकाली गई कुल वैल्यू होती है।
इसे आसान भाषा में समझें तो:
मार्केट कैप = कुल बकाया शेयर × मौजूदा शेयर कीमत
उदाहरण के लिए, अगर किसी कंपनी के 1 करोड़ शेयर बाजार में मौजूद हैं और एक शेयर की कीमत ₹20 है, तो कंपनी का मार्केट कैप होगा:
1 करोड़ × ₹20 = ₹20 करोड़
मार्केट कैप बढ़ने या घटने की वजह क्या है?
किसी कंपनी का मार्केट कैप मुख्य रूप से उसके शेयर की कीमत में बदलाव के साथ ऊपर-नीचे होता है।
| मार्केट कैप बढ़ने के कारण | मार्केट कैप घटने के कारण |
|---|---|
| शेयर कीमत में तेजी | शेयर कीमत में गिरावट |
| मजबूत वित्तीय नतीजे | कमजोर वित्तीय प्रदर्शन |
| सकारात्मक खबर या बड़ा बिजनेस अपडेट | नकारात्मक खबर या घटना |
| बाजार में पॉजिटिव सेंटीमेंट | बाजार में कमजोरी |
| कंपनी की ग्रोथ की उम्मीद | भविष्य की ग्रोथ को लेकर चिंता |
हालांकि, मार्केट कैप में बदलाव के पीछे सिर्फ कंपनी के प्रदर्शन का हाथ नहीं होता। पूरे बाजार का माहौल, आर्थिक परिस्थितियां, सेक्टर का प्रदर्शन और निवेशकों की धारणा भी शेयर कीमत को प्रभावित करती है।
कंपनी पर मार्केट कैप बढ़ने का क्या असर पड़ता है?
बड़ा मार्केट कैप कंपनी की बाजार में मजबूत स्थिति को दर्शाता है। इससे कंपनी के लिए भविष्य में पूंजी जुटाना, कारोबार का विस्तार करना और दूसरी कंपनियों का अधिग्रहण करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
हालांकि, केवल मार्केट कैप बढ़ना यह साबित नहीं करता कि कंपनी की वित्तीय स्थिति हर लिहाज से मजबूत है। निवेशकों को कंपनी की कमाई, कर्ज, कैश फ्लो और वैल्यूएशन जैसे दूसरे आंकड़ों को भी देखना चाहिए।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब?
किसी कंपनी के शेयर की कीमत बढ़ने पर उसके शेयर रखने वाले निवेशकों की मार्केट वैल्यू बढ़ जाती है। वहीं शेयर की कीमत गिरने पर निवेशकों के निवेश का बाजार मूल्य कम हो सकता है।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कंपनी के शेयर में तेजी आती है तो उसके शेयरधारकों की होल्डिंग की मौजूदा वैल्यू भी बढ़ जाती है। लेकिन इसका फायदा तभी वास्तविक मुनाफे में बदलता है जब निवेशक शेयर बेचकर उस लाभ को बुक करता है।
बाजार में इस सप्ताह कैसा रहा रुझान?
कुल मिलाकर टॉप-10 कंपनियों के बीच सप्ताह का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। SBI, रिलायंस, TCS और L&T ने जहां अपनी बाजार वैल्यू में बढ़ोतरी दर्ज की, वहीं LIC समेत छह कंपनियों के मार्केट कैप में गिरावट रही।
यह आंकड़े बताते हैं कि किसी एक सप्ताह में बड़ी कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन भी काफी अलग-अलग हो सकता है। इसलिए केवल मार्केट कैप में एक सप्ताह के बदलाव को देखकर निवेश का फैसला लेने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और लंबी अवधि के प्रदर्शन को देखना जरूरी है।