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रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles’ का विमोचन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कोविंद के संघर्षपूर्ण जीवन, सादगी और सार्वजनिक सेवा के प्रति उनके योगदान की सराहना की। कार्यक्रम में अपनी मां का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री भावुक भी नजर आए।

पीएम मोदी ने की रामनाथ कोविंद के जीवन की सराहना

रामनाथ कोविंद की आत्मकथा में उनके बचपन, शुरुआती जीवन, सार्वजनिक सेवा और देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल से जुड़े अनुभवों को शामिल किया गया है।

किताब के विमोचन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति पद के दौरान रामनाथ कोविंद का मार्गदर्शन, स्नेह और आत्मीयता उनके लिए बेहद मूल्यवान रही। उन्होंने कहा कि कोविंद का जीवन कठिन परिस्थितियों से निकलकर आगे बढ़ने और चुनौतियों को अवसर में बदलने की प्रेरणा देता है।

‘भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण धरोहर’

पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने रामनाथ कोविंद के व्यक्तित्व और उनकी कार्यक्षमता को करीब से देखा है। उनके अनुसार, यह आत्मकथा केवल एक व्यक्ति के जीवन की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र और समाज के लिए भी महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकती है।

किताब में कोविंद के जीवन के अलग-अलग पड़ावों, संघर्षों, सार्वजनिक सेवा और राष्ट्रपति के रूप में उनके अनुभवों को दर्ज किया गया है।

मां को याद कर भावुक हुए प्रधानमंत्री मोदी

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने रामनाथ कोविंद के बचपन के संघर्षों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कोविंद ने कम उम्र में ही अपनी मां को खो दिया था। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने अपनी मां को याद किया और भावुक हो गए।

पीएम मोदी ने कहा कि वह खुद को इस मामले में सौभाग्यशाली मानते हैं कि उनकी मां लंबे समय तक उनके साथ रहीं और उन्हें उनका आशीर्वाद मिलता रहा। इसके बावजूद वह आज भी अपनी मां की कमी महसूस करते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कम उम्र में मां को खोना किसी भी इंसान के लिए बेहद कठिन अनुभव हो सकता है, लेकिन रामनाथ कोविंद ने इन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने संघर्षों से ताकत हासिल की और लगातार आगे बढ़ते रहे।

संघर्षों से राष्ट्रपति भवन तक का सफर

रामनाथ कोविंद का जीवन सामान्य परिस्थितियों से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की प्रेरक यात्रा के रूप में देखा जाता है। उनकी आत्मकथा में इसी सफर के संघर्षों, चुनौतियों और अनुभवों को विस्तार से दर्ज किया गया है।

यह पुस्तक पाठकों को रामनाथ कोविंद के निजी जीवन के साथ-साथ उनके सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रपति पद के दौरान सामने आई परिस्थितियों को समझने का अवसर देती है।

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