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Fatty Liver Problem: 5 वजहों से हो सकती है फैटी लिवर की समस्या! बचाव के लिए बदल लें ये आदतें

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फैटी लिवर ऐसी समस्या है जिसमें लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। शुरुआत में इसके लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं या बिल्कुल नजर नहीं आते, इसलिए कई लोगों को इसका पता रूटीन जांच या अल्ट्रासाउंड के दौरान चलता है। खासकर मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस और खून में बढ़े हुए ट्राइग्लिसराइड्स जैसी स्थितियां फैटी लिवर के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

लिवर में फैट जमा होना हर बार गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन कुछ लोगों में सूजन और लिवर को नुकसान पहुंचने की स्थिति विकसित हो सकती है। समय के साथ यह फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए वजन, खान-पान, शारीरिक गतिविधि और ब्लड शुगर जैसे जोखिम कारकों को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।

बढ़ता वजन और पेट की चर्बी
फैटी लिवर का एक बड़ा जोखिम अधिक वजन या मोटापा है। खासकर कमर के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी शरीर में मेटाबॉलिक गड़बड़ियों से जुड़ी हो सकती है और लिवर में फैट जमा होने की संभावना बढ़ा सकती है। इसलिए वजन को स्वस्थ सीमा में बनाए रखना बचाव का अहम हिस्सा है।

डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस
टाइप-2 डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस का संबंध फैटी लिवर से देखा गया है। जब शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो मेटाबॉलिज्म प्रभावित हो सकता है और लिवर में फैट जमा होने का जोखिम बढ़ सकता है। ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना इसलिए सिर्फ डायबिटीज ही नहीं, लिवर की सेहत के लिए भी महत्वपूर्ण है।

अनहेल्दी खान-पान
बहुत अधिक कैलोरी, संतृप्त वसा और ज्यादा मात्रा में मीठे खाद्य-पेय पदार्थों का सेवन वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। खासतौर पर अधिक मात्रा में फ्रुक्टोज और मीठे पेय फैटी लिवर के जोखिम से जुड़े पाए गए हैं। डाइट में सब्जियां, फल, साबुत अनाज और संतुलित मात्रा में स्वस्थ वसा को जगह देना बेहतर विकल्प माना जाता है।

शारीरिक गतिविधि की कमी
दिनभर बैठे रहना और नियमित एक्सरसाइज न करना भी मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। शारीरिक गतिविधि वजन घटाने के अलावा फैटी लिवर को मैनेज करने में भी मदद कर सकती है। इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार नियमित वॉक, व्यायाम या दूसरी शारीरिक गतिविधियों को रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बनाना फायदेमंद हो सकता है।

ज्यादा शराब का सेवन
शराब का अत्यधिक सेवन लिवर में फैट जमा होने और शराब से संबंधित लिवर डिजीज का कारण बन सकता है। वहीं, मेटाबॉलिक कारणों से होने वाला फैटी लिवर अलग स्थिति है। कुछ लोगों में दोनों जोखिम साथ भी मौजूद हो सकते हैं। इसलिए लिवर की समस्या होने पर शराब से दूरी बनाए रखना और डॉक्टर की सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

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