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मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलें तेज, कई मंत्रियों के विभाग बदलने के संकेत

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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में इसी महीने बड़े फेरबदल और मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। संगठन में महत्वपूर्ण बदलावों के बाद अब केंद्रीय मंत्रिपरिषद में भी व्यापक स्तर पर बदलाव की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि दो दर्जन से अधिक मंत्रियों के विभागों में बदलाव हो सकता है।

आगामी विधानसभा चुनावों और सामाजिक एवं क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए सरकार अपनी टीम में नए सिरे से जिम्मेदारियों का बंटवारा कर सकती है। संभावित फेरबदल में सहयोगी दलों को साधने के साथ-साथ संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर रहने की संभावना है।

पीयूष गोयल की जिम्मेदारी बरकरार रहने के संकेत

भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाए जाने के बावजूद पीयूष गोयल के केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पद पर बने रहने की चर्चा है। अमेरिका समेत अन्य देशों के साथ महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौतों के बीच सरकार उनकी मौजूदा जिम्मेदारी में तत्काल बदलाव के पक्ष में नहीं दिख रही है।

वहीं पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को लेकर भी स्थिति पर नजर बनी हुई है। उनका राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होना है। यदि उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा जाता है, तो उनके मंत्री पद को लेकर भी फैसला लेना पड़ सकता है। ऐसे में कैबिनेट में सिख प्रतिनिधित्व को लेकर नए समीकरण बन सकते हैं।

महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिहाज से राजस्थान से डॉ. अलका गुर्जर का नाम भी संभावित चेहरों में चर्चा में बताया जा रहा है।

सहयोगी दलों की मांगों से बनेंगे नए समीकरण

एनडीए के सहयोगी दल भी संभावित फेरबदल में अहम भूमिका निभा सकते हैं। लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान द्वारा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय से बड़े विभाग की मांग किए जाने की चर्चा है। वहीं महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे गुट के 13 सांसदों के आधार पर एक और कैबिनेट पद की मांग की खबरें सामने आ रही हैं।

इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच चर्चा होने की भी बात कही जा रही है।

तमिलनाडु को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा द्रमुक (DMK) को केंद्र की सत्ता में शामिल करने की संभावनाओं की है। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर प्रधानमंत्री स्तर पर बातचीत आगे बढ़ाए जाने की अटकलें हैं।

यूपी और हिमाचल पर भी नजर

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा राज्य के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। चर्चा है कि उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक में से किसी एक को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चा की जिम्मेदारी मिलने के बाद केशव प्रसाद मौर्य के नाम को लेकर चर्चाएं और तेज हुई हैं।

वहीं हिमाचल प्रदेश से जेपी नड्डा और अनुराग ठाकुर जैसे प्रमुख चेहरों को लेकर भी पार्टी की चुनावी रणनीति और सामाजिक संतुलन के हिसाब से महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, मंत्रिमंडल में संभावित बदलावों को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व की रणनीति के आधार पर ही सामने आएगा।

 

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