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ट्रम्प का कनाडा पर बड़ा टैरिफ वार, 50% शुल्क लागू: तीन दिन की ट्रेड बातचीत बेनतीजा; PM कार्नी बोले- अमेरिका को मिलेगा करारा जवाब

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अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार समझौते को लेकर तीन दिनों तक चली बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर यानी लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपए के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया।

यह नया टैरिफ कनाडा से अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान का लगभग 5% हिस्सा प्रभावित करेगा। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच वॉशिंगटन डीसी में लगातार तीन दिन बातचीत चली, लेकिन अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बन पाई।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के कदम पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर अमेरिका कनाडाई सामान पर टैरिफ लगाएगा, तो कनाडा भी अमेरिकी उत्पादों पर उसी अनुपात में जवाबी शुल्क लगाएगा।

आखिर अमेरिका ने कनाडा पर 50% टैरिफ क्यों लगाया?

अमेरिका का आरोप है कि कनाडा की कुछ व्यापार नीतियां अमेरिकी कंपनियों को समान अवसर नहीं देतीं। अमेरिका ने पहले नए टैरिफ को 20 अगस्त से लागू करने की घोषणा की थी।

हालांकि, अंतिम समय में दोनों देशों ने बातचीत का रास्ता चुना। इसके बाद ट्रम्प ने टैरिफ लागू करने की समयसीमा तीन दिन बढ़ा दी, ताकि दोनों पक्ष किसी समझौते तक पहुंच सकें।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, बातचीत में कई मुद्दों पर प्रगति हुई थी, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण मामलों में दोनों देशों के बीच मतभेद कायम रहे। इनमें ऑटोमोबाइल, डेयरी उत्पादों की बाजार पहुंच, शराब के व्यापार और कुछ अन्य कारोबारी नियम प्रमुख थे।

1. अमेरिकी कार कंपनियों के साथ भेदभाव का आरोप

अमेरिका लंबे समय से शिकायत करता रहा है कि कनाडा की व्यापार नीतियां अमेरिकी ऑटो कंपनियों को पर्याप्त समान अवसर नहीं देतीं।

अमेरिका चाहता है कि कनाडा उसके उत्पादों के लिए अपने बाजार को ज्यादा खोले। इसी मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से बातचीत और विवाद जारी है।

दूसरी तरफ, कनाडा ने अमेरिका से स्टील, एल्युमिनियम, कारों और लकड़ी पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ में राहत की मांग की थी। लेकिन अमेरिका इन शुल्कों में बड़ी रियायत देने के लिए तैयार नहीं हुआ।

2. कनाडा का डेयरी बाजार पर सख्त रुख

कनाडा अपने डेयरी सेक्टर को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए कई तरह के नियम और प्रतिबंध लागू करता है।

अमेरिका चाहता है कि उसके दूध और अन्य डेयरी उत्पादों को कनाडा के बाजार में ज्यादा पहुंच मिले। अमेरिकी पक्ष का मानना है कि कनाडा के मौजूदा नियम अमेरिकी उत्पादकों के लिए बाजार में प्रवेश मुश्किल बनाते हैं।

वहीं, कनाडा अपने डेयरी उद्योग को लेकर बड़े बदलाव या व्यापक रियायत देने से बचता रहा है।

3. अमेरिकी शराब को लेकर भी विवाद

दोनों देशों के बीच शराब का व्यापार भी विवाद का एक बड़ा मुद्दा रहा है।

कनाडा के कुछ हिस्सों में अमेरिकी शराब की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंधों को अमेरिका अपने उत्पादों के साथ भेदभाव के रूप में देखता है।

इसके अलावा कनाडाई सॉफ्टवुड लंबर यानी लकड़ी के व्यापार को लेकर भी दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है।

कनाडा ने भी दिया जवाबी टैरिफ का संकेत

अमेरिका के 50% टैरिफ के बाद कनाडा ने भी जवाबी कार्रवाई का ऐलान कर दिया है।

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि कनाडा अमेरिका के टैरिफ का “डॉलर के बदले डॉलर” के आधार पर जवाब देगा।

इसका मतलब है कि अमेरिका जितने मूल्य के कनाडाई उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाएगा, कनाडा भी अमेरिकी उत्पादों पर उसी मूल्य के हिसाब से जवाबी टैरिफ लगा सकता है।

अगर दोनों देशों के बीच जल्द कोई समझौता नहीं हुआ, तो इस टैरिफ वॉर का असर दोनों देशों के कारोबार, कंपनियों और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ता व्यापार तनाव अब उत्तर अमेरिकी बाजार के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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