Vande Mataram News: कांग्रेस के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो छंदों के गायन के फैसले को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान तेज होता दिखाई दे रहा है। बीजेपी ने कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के इस निर्णय की कड़ी आलोचना करते हुए 22 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक में प्रस्ताव पारित कर इसकी निंदा की।
बीजेपी ने अपने प्रस्ताव में कहा कि छह छंदों वाला पूरा ‘वंदे मातरम’ भारत की राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता संग्राम और देश की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा हुआ है। पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसके उचित राष्ट्रीय स्थान की रक्षा की जानी चाहिए।
‘हर गली-मोहल्ले में होगा वंदे मातरम का गुणगान’
बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पदाधिकारियों की बैठक में कार्यकर्ताओं को देशभर में ‘वंदे मातरम’ को लेकर अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी का हर कार्यकर्ता देश की हर गली और मोहल्ले में जाकर ‘वंदे मातरम’ का गुणगान करेगा और लोगों को इसके इतिहास और महत्व के बारे में बताएगा।
पात्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश की जनता कांग्रेस की कथित तुष्टीकरण की राजनीति को देख रही है।
बीजेपी के प्रस्ताव में क्या कहा गया?
बीजेपी के प्रस्ताव के मुताबिक, 1937 में उठी आपत्तियों के बाद ‘वंदे मातरम’ के छह में से शुरुआती दो पदों को राष्ट्रीय अवसरों पर गाने की परंपरा को स्वीकार किया गया था।
बीजेपी ने आरोप लगाया कि उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों में सांप्रदायिक दबाव को राष्ट्रीय प्रतीकों के स्वरूप को प्रभावित करने की अनुमति दी गई।
प्रस्ताव में 1938 में जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना के बीच हुए पत्राचार का भी उल्लेख किया गया है। बीजेपी का दावा है कि उस समय लिए गए राजनीतिक निर्णयों का असर ‘वंदे मातरम’ के सार्वजनिक स्वरूप पर पड़ा।
‘वंदे मातरम’ किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं
बीजेपी ने अपने प्रस्ताव में कहा कि आजाद भारत में ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मान प्राप्त है।
पार्टी ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय गीत किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं है और इसका सम्मान चुनावी समीकरण या राजनीतिक सुविधा के आधार पर तय नहीं किया जाना चाहिए।
बीजेपी ने कांग्रेस के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ भारत की राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जुड़ा हुआ है।
अब आगे क्या?
‘वंदे मातरम’ को लेकर बीजेपी के प्रस्ताव और संबित पात्रा के बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन सकता है। एक तरफ बीजेपी इसे राष्ट्रीय सम्मान और विरासत से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस का दो छंदों वाला निर्णय राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है।
ऐसे में आने वाले दिनों में ‘वंदे मातरम’ के पूरे स्वरूप और उसके सार्वजनिक गायन को लेकर बीजेपी-कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।