भारत करीब एक दशक बाद बड़ी मात्रा में चीनी आयात करने जा रहा है। केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने और बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब देश में चीनी के दाम पिछले दो महीनों में करीब 40% बढ़ चुके हैं और त्योहारी सीजन से पहले मांग बढ़ने की उम्मीद है।
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कम उत्पादन, घटता शुरुआती स्टॉक, एथेनॉल के लिए गन्ने का डायवर्जन और घरेलू बाजार में tight supply जैसे कई कारण हैं। आखिर भारत, जो दुनिया के बड़े चीनी उत्पादकों में है, उसे एक दशक बाद आयात की जरूरत क्यों पड़ी? समझिए पूरी वजह।
चीनी की कीमतें बढ़ने के 3 बड़े कारण
1. चीनी का उत्पादन अनुमान से कम रहा
द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल देश में चीनी का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले काफी कम रहने का अनुमान है। जब देश में चीनी का उत्पादन कम होता है, लेकिन लोगों और कारोबारियों की मांग लगभग उतनी ही रहती है, तो बाजार में उपलब्ध चीनी घटने लगती है। यही वजह है कि इस साल चीनी के स्टॉक पर दबाव बढ़ा है।
2. एथेनॉल के लिए गन्ने का डायवर्जन बढ़ा
गन्ने का पूरा इस्तेमाल चीनी बनाने में नहीं होता। इसका एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट किया जाता है। इससे चीनी की संभावित उपलब्धता कम हो जाती है। जब उत्पादन पहले ही अनुमान से कम हो, तब एथेनॉल के लिए होने वाला डायवर्जन घरेलू चीनी आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
3. घटते स्टॉक और त्योहारी मांग ने बढ़ाया दबाव
सरकार ने 2025-26 सीजन में पहले 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। बाद में कुल अनुमत मात्रा बढ़ाकर करीब 20 लाख टन की गई। हालांकि, वास्तविक निर्यात इस quota से काफी कम रहा। इस बीच उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक को लेकर अनुमान कमजोर होते गए, जिससे घरेलू बाजार में सप्लाई का दबाव बढ़ा।
दो महीने में 40% तक बढ़े चीनी के दाम
चीनी की कीमतों में तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दो महीनों में घरेलू बाजार में इसके दाम करीब 40% तक बढ़ गए हैं। मंगलवार को चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 52.3 रुपये प्रति किलो रही। यह एक साल पहले की कीमत से करीब 13% ज्यादा है। जुलाई में भी चीनी के दाम 9% से ज्यादा बढ़े थे। कीमतों में इस तेजी की एक बड़ी वजह बाजार में कम सप्लाई और आगे मांग बढ़ने की आशंका है।
चीनी का स्टॉक कितना रह गया?
उद्योग के अलग-अलग अनुमानों के मुताबिक, घरेलू खपत और एथेनॉल के लिए डायवर्जन के बाद सीजन के अंत में carry-forward stock सामान्य स्तर से कम रहने की आशंका है। इससे नए सीजन की शुरुआत तक बाजार में उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी है।
उद्योग के अनुमान के मुताबिक, एथेनॉल बनाने के लिए चीनी अलग करने के बाद 2025-26 में करीब 2.79 करोड़ टन नेट चीनी उपलब्ध हुई। देश में शुरुआती स्टॉक करीब 47 लाख टन था। यानी कुल उपलब्ध चीनी करीब 3.26 करोड़ टन रही। इसमें से करीब 2.8 करोड़ टन घरेलू खपत में चली गई और करीब 8 लाख टन चीनी का निर्यात हुआ।
त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता
आने वाले त्योहारों के दौरान मिठाई, बेकरी और दूसरे खाद्य उत्पादों में चीनी की मांग बढ़ सकती है। ऐसे में सरकार को चिंता है कि अगर अभी बाजार में सप्लाई नहीं बढ़ाई गई तो कीमतें और बढ़ सकती हैं। उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, कुछ खरीदार सामान्य 10-15 दिन की जरूरत के बजाय ज्यादा चीनी खरीदकर रख रहे हैं। इससे बाजार में सप्लाई को लेकर दबाव और बढ़ रहा है। इसी वजह से सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात करने का फैसला लिया है, ताकि बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहे।
चीनी उत्पादन के अनुमान क्यों बदले?
सीजन की शुरुआत में चीनी उत्पादन को लेकर अनुमान काफी बेहतर थे, लेकिन बाद में उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक को लेकर तस्वीर कमजोर होती गई। मौसम, गन्ने की उपलब्धता और एथेनॉल के लिए डायवर्जन जैसे कारणों से अलग-अलग उद्योग संगठनों ने समय-समय पर अपने अनुमान संशोधित किए। इससे घरेलू सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी।
सरकार ने चीनी का स्टॉक जमा करने पर भी लगाई रोक
हर महीने 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी की खपत करने वाले 1 सितंबर से 30 नवंबर तक अपने पास 15 दिन की जरूरत से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे। इससे पहले सरकार ने चीनी डीलर्स के लिए भी 1 अगस्त से 30 नवंबर तक स्टॉक रखने की सीमा लागू की थी। डीलर्स को अपने स्टॉक की जानकारी घोषित कर उसे हर सप्ताह अपडेट करना होगा।
अब आगे क्या होगा?
10 लाख टन आयात से घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने में मदद मिल सकती है, लेकिन इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आयातित चीनी कितनी जल्दी बाजार में पहुंचती है। सरकार के सामने फिलहाल कीमतों को नियंत्रित रखने, त्योहारी मांग पूरी करने और अगले चीनी सीजन तक पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने की चुनौती है।