जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को पर्यटकों पर हुए भीषण आतंकी हमले की जांच में एनआईए ने पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसके सरगना हाफिज सईद पर शिकंजा कस दिया है। हमले में 26 बेकसूर लोगों की जान गई थी। जांच एजेंसी ने हाल ही में हाफिज सईद के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके बाद अब जम्मू की विशेष एनआईए अदालत में उसका ट्रायल शुरू कराने की औपचारिक कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
विदेश मंत्रालय के जरिए भेजा जाएगा कोर्ट समन
एनआईए की ओर से आतंकी सरगना हाफिज सईद को कोर्ट का समन भारत के विदेश मंत्रालय के जरिए औपचारिक रूप से पाकिस्तान भेजा जाएगा। इस समन के जरिए 76 वर्षीय हाफिज सईद को जम्मू स्थित विशेष एनआईए अदालत में ट्रायल के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया जाएगा।
विशेष जज द्वारा पहले ही उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया जा चुका है, ताकि उसे न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में लाया जा सके।
सप्लीमेंट्री चार्जशीट में साजिश और युद्ध छेड़ने का आरोप
एनआईए ने अपनी जांच में पाया कि पहलगाम हमले की पूरी साजिश सीमा पार पाकिस्तान में हाफिज सईद और उसके हैंडलर्स ने रची थी। एजेंसी ने उसे व्यक्तिगत रूप से और प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा तथा उसके मुखौटा संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) के प्रमुख के रूप में आरोपी बनाया है।
उस पर भारतीय न्याय संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आतंक फैलाने की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
पेश न होने पर बिना हाजिरी के चलेगा ट्रायल और आएगा फैसला
यदि हाफिज सईद अंतरराष्ट्रीय कानूनी समन के बावजूद अदालत में पेश नहीं होता है, तो एनआईए कोर्ट भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 356 के तहत आगे की कार्रवाई करेगी। इस कानूनी प्रावधान के तहत अदालत भगोड़े आरोपी की गैर-मौजूदगी में भी ट्रायल की प्रक्रिया पूरी कर सकती है और अंतिम फैसला सुना सकती है।