उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा आर्थिक रोडमैप तैयार किया है। राज्य सरकार ने प्रदेश में कुल 120 लाख करोड़ रुपये के निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इसके तहत हर साल औसतन करीब 23 लाख करोड़ रुपये के निवेश को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख ग्रोथ इंजन और बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके लिए बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ नए औद्योगिक हब, मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर और विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं।
हर साल 23 लाख करोड़ रुपये निवेश का लक्ष्य
1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सरकार ने निवेश योजना को अलग-अलग वार्षिक चरणों में बांटने की रणनीति बनाई है। इसके तहत प्रतिवर्ष लगभग 23 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार को उम्मीद है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और मजबूत कानून-व्यवस्था के जरिए निवेश का माहौल और बेहतर होगा।
एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होंगे औद्योगिक हब
बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के लिए प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में नए औद्योगिक हब और SEZ विकसित किए जा रहे हैं। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास लैंड बैंक तैयार कर औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित करने की योजना है।
इसके अलावा सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, ग्रीन हाइड्रोजन और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे तेजी से उभरते क्षेत्रों के लिए विशेष जोन विकसित किए जा रहे हैं।
निवेशकों को सिंगल विंडो और नीतिगत राहत
बड़े घरेलू और वैश्विक निवेशकों को उत्तर प्रदेश में कारोबार शुरू करने के लिए आसान प्रक्रियाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए निवेश मित्र और सिंगल-विंडो सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
भूमि आवंटन, पूंजीगत सब्सिडी और स्टांप शुल्क में छूट जैसी नीतिगत सुविधाओं के जरिए उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य परियोजनाओं को तय समयसीमा में धरातल पर उतारना है।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा
इस मेगा इन्वेस्टमेंट प्लान से राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। बड़े पैमाने पर निवेश से विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
बड़े उद्योगों की स्थापना से स्थानीय MSME इकाइयों को भी नए कारोबार और सप्लाई चेन से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों और क्रय शक्ति को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।