कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के साहस, जांबाज पायलट्स और एयरफोर्स के भीतर की जिंदगी को केंद्र में रखकर वेब सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ तैयार की गई है। सीरीज में 1999 के युद्ध के दौरान एयरफोर्स की भूमिका के साथ-साथ उन अधिकारियों और परिवारों की कहानियां भी दिखाई जाएंगी, जिनकी जिंदगी पर युद्ध का गहरा असर पड़ा।
इस प्रोजेक्ट के क्रिएटर कुशल श्रीवास्तव हैं, जो 1999 से 2006 तक भारतीय वायुसेना में सेवाएं दे चुके हैं। दिग्गज कॉमेडियन दिवंगत राजू श्रीवास्तव की बेटी अंतरा श्रीवास्तव इस प्रोजेक्ट में एसोसिएट डायरेक्टर और हेड रिसर्चर के तौर पर जुड़ी हैं।
दोनों ने एक बातचीत में सीरीज की रिसर्च, शूटिंग, एयरफोर्स की कार्यसंस्कृति, MiG-21 की शूटिंग और प्रोजेक्ट से जुड़े भावुक अनुभव साझा किए।
2018 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
कुशल श्रीवास्तव के मुताबिक, ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ का विचार 2018 में आया, लेकिन कारगिल युद्ध से उनका जुड़ाव इससे काफी पहले का था। उन्होंने 1998 में एयरफोर्स की परीक्षा दी थी और इसी दौरान कारगिल युद्ध शुरू हो गया।
युद्ध के दौरान अजय आहूजा और नचिकेता से जुड़ी घटनाओं को उन्होंने करीब से देखा और बाद में दिसंबर 1999 में एयरफोर्स जॉइन की। करीब सात साल सेवा देने के बाद वह फिल्ममेकिंग की दुनिया में आए।
कुशल का मानना था कि एयरफोर्स की वास्तविक जिंदगी और उसकी कार्यसंस्कृति को फिल्मों और सीरीज में उस तरह जगह नहीं मिली, जिस तरह मिलनी चाहिए थी। इसी सोच के साथ उन्होंने 2018 में इस कहानी पर काम शुरू किया।
देशभक्ति से ज्यादा साथी के लिए सम्मान पर फोकस
कुशल के अनुसार, कहानी का मकसद सिर्फ बड़े-बड़े देशभक्ति संवाद दिखाना नहीं है। सीरीज में उस सोच को प्रमुखता दी गई है, जिसमें एयरफोर्स का एक अधिकारी अपने साथी को पीछे नहीं छोड़ने की भावना से काम करता है।
फाइटर पायलट के लिए देश के प्रति कर्तव्य के साथ अपने साथियों का भरोसा और प्रोफेशनल सम्मान भी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए सीरीज को जरूरत से ज्यादा जिंगोस्टिक बनाने के बजाय वास्तविक घटनाओं और मानवीय भावनाओं पर जोर दिया गया है।
एयरफोर्स का कल्चर आर्मी से अलग
कुशल बताते हैं कि एयरफोर्स की कार्यशैली आर्मी से काफी अलग है। एक फाइटर पायलट की सुरक्षा उस पूरी टीम पर निर्भर करती है, जो विमान को उड़ान के लिए तैयार करती है।
इसीलिए पायलट के लिए जरूरी होता है कि वह विमान तैयार करने वाले कर्मचारी से बात करे और यह सुनिश्चित करे कि वह मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह ठीक है। यही आपसी भरोसा और निर्भरता एयरफोर्स की संस्कृति का अहम हिस्सा है, जिसे सीरीज में दिखाने की कोशिश की गई है।
फिल्म से वेब सीरीज में बदला प्रोजेक्ट
शुरुआत में ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को फिल्म के तौर पर बनाया जाना था। 2018 में स्क्रिप्ट तैयार होने के साथ एक अभिनेता को भी साइन कर लिया गया था, लेकिन कोरोना महामारी के कारण सिनेमाघर बंद हो गए और प्रोजेक्ट रुक गया।
बाद में कुशल ने इसे नेटफ्लिक्स के सामने वेब सीरीज के रूप में पेश किया। प्लेटफॉर्म को कहानी में सीरीज की संभावना नजर आई और प्रोड्यूसर मैचबॉक्स के सहयोग से प्रोजेक्ट को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया गया।
कुशल के साथ अभिजीत सिंह परमार इसके को-क्रिएटर और शो रनर हैं।
कलाकारों ने एयरफोर्स बेस में की तैयारी
सीरीज के कलाकारों ने अपने किरदारों को वास्तविक बनाने के लिए काफी तैयारी की। उन्होंने परेड ग्राउंड में अभ्यास किया, एयरफोर्स अधिकारियों और पायलट्स से मुलाकात की और एयरफोर्स बेस के अंदर समय बिताया।
जिमी शेरगिल ने एयरफोर्स अधिकारी धनोआ से जुड़े किरदार को समझने के लिए उनके घर जाकर उनके व्यवहार और बातचीत के तरीके को करीब से जाना। वहीं सिद्धार्थ ने अलका आहूजा से मुलाकात कर उनके व्यक्तित्व और अनुभवों को समझने की कोशिश की।
कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने भी दोनों कलाकारों को प्रोजेक्ट से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
MiG-21 की शूटिंग बनी बड़ी चुनौती
प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक MiG-21 से जुड़े सीक्वेंस की शूटिंग थी। शूटिंग के दौरान ये विमान धीरे-धीरे सेवा से बाहर हो रहे थे और उनकी उड़ान भी बंद होने लगी थी।
टीम ने अनुरोध कर MiG-21 की आखिरी उड़ानों को कैमरे में कैद किया। इसके साथ एयर वॉरफेयर सीक्वेंस को वास्तविक दिखाने के लिए हाइड्रॉलिक बेस, कैमरा सिस्टम और वीएफएक्स का इस्तेमाल किया गया।
यूके से हाइड्रॉलिक सिस्टम, हैदराबाद से कैमरा सिस्टम और गेमिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित लाइटिंग सिस्टम की मदद ली गई। रियल प्लेन, हाइड्रॉलिक मूवमेंट और वीएफएक्स को मिलाकर युद्ध के दृश्यों को ज्यादा वास्तविक बनाने की कोशिश की गई।
अंतरा श्रीवास्तव बनीं हेड रिसर्चर
अंतरा श्रीवास्तव इस प्रोजेक्ट से शुरुआत से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कुशल के साथ लंबे समय तक विज्ञापन, म्यूजिक वीडियो और फिल्म प्रोजेक्ट्स पर काम किया है।
‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में उन्होंने एसोसिएट डायरेक्टर और हेड रिसर्चर की जिम्मेदारी संभाली। उनकी भूमिका सिर्फ प्रोडक्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि कहानी की रिसर्च और वास्तविक घटनाओं को समझने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
एयरफोर्स अधिकारियों से की गई गहन रिसर्च
कुशल और उनकी टीम ने कहानी लिखने से पहले एयर हेडक्वार्टर्स से संपर्क किया। टीम ने अलग-अलग शहरों में जाकर कारगिल युद्ध से जुड़े अधिकारियों और वॉर हीरोज से मुलाकात की।
यूनिफॉर्म, फ्लाइंग और वॉर स्ट्रैटेजी जैसे पहलुओं के लिए अलग-अलग डिफेंस कंसल्टेंट्स को टीम में शामिल किया गया। करीब चार-पांच विशेषज्ञ लगातार प्रोजेक्ट के साथ जुड़े रहे और उन्होंने लेखन से लेकर शूटिंग तक इनपुट दिया।
पाकिस्तान के पक्ष पर भी हुई रिसर्च
अंतरा के मुताबिक, टीम ने केवल भारतीय पक्ष की घटनाओं पर रिसर्च नहीं की। पाकिस्तान की रणनीति, तत्कालीन राजनीतिक घटनाक्रम और उस समय के प्रमुख नेताओं के बीच की परिस्थितियों को भी समझने की कोशिश की गई।
रिसर्च का उद्देश्य कारगिल युद्ध के पूरे दौर को ज्यादा व्यापक तरीके से समझना था, ताकि कहानी सिर्फ एक पक्ष की घटनाओं तक सीमित न रहे।
110 दिन तक चली शूटिंग
सीरीज की शूटिंग करीब 110 दिनों तक चली। राजस्थान, हिमाचल, ग्वालियर, दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब और मुंबई समेत कई जगहों पर शूटिंग की गई।
हिमाचल में टीम ने माइनस 20 से 15 डिग्री तक के तापमान में काम किया, जबकि राजस्थान और बीकानेर में गर्म मौसम का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट और एयरफोर्स स्टेशनों पर भी शूटिंग की गई।
कहानी में युद्ध, कूटनीति, राजनीति और एयरफोर्स से जुड़े कई पहलू होने के कारण अलग-अलग लोकेशन पर शूट करना जरूरी था।
राजू श्रीवास्तव के निधन से जुड़ा भावुक दौर
इस प्रोजेक्ट के दौरान अंतरा श्रीवास्तव के पिता और दिग्गज कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव का निधन हो गया। अंतरा के मुताबिक, सीरीज को ग्रीनलिट किए जाने के कुछ ही समय बाद उनके पिता की तबीयत बिगड़ी और सितंबर 2022 में उनका निधन हो गया।
प्रोजेक्ट की तैयारियां इसके बावजूद जारी रहीं। कास्टिंग, कॉस्ट्यूम और प्री-प्रोडक्शन का काम चलता रहा।
बाद में रिलीज से कुछ समय पहले कुशल के पिता का भी निधन हो गया। अंतरा ने इस पूरे दौर को बेहद भावुक बताया। सीरीज के अंत में राजू श्रीवास्तव को स्पेशल थैंक्स भी दिया गया है।
MiG-21 पर बनी ‘द लास्ट सल्यूट’ डॉक्यूमेंट्री
‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के अलावा टीम ने MiG-21 पर करीब 80 मिनट की डॉक्यूमेंट्री ‘द लास्ट सल्यूट’ भी तैयार की है।
MiG-21 के सेवा से बाहर होने के दौरान शूट किए गए फुटेज का इस्तेमाल इस डॉक्यूमेंट्री में किया गया है। यह भी नेटफ्लिक्स का प्रोजेक्ट है और अगस्त के आखिर में रिलीज होने की जानकारी दी गई है।
अंतरा की अपनी पहचान बनाने की कोशिश
अंतरा श्रीवास्तव का कहना है कि राजू श्रीवास्तव की बेटी के रूप में पहचान मिलना उनके लिए गर्व की बात है, लेकिन वह फिल्म और सीरीज की दुनिया में अपनी अलग पहचान भी बनाना चाहती हैं।
वह फिलहाल एक्टिंग के बजाय पर्दे के पीछे काम करने पर ध्यान दे रही हैं। उनका लक्ष्य फिल्ममेकिंग के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाना है।
वह मानती हैं कि उनके पिता से मिला ऑब्जर्वेशन और रोजमर्रा की जिंदगी में ह्यूमर को देखने का नजरिया उनके काम में भी दिखाई देता है।