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मेंस हॉकी वर्ल्ड कप में भारत की हार, बेल्जियम ने शूटआउट में 4-3 से हराया; 8वें स्थान पर रहा

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नई दिल्ली। मेंस हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का सफर निराशाजनक अंदाज में खत्म हुआ। शुक्रवार को 7वें स्थान के मुकाबले में भारत को बेल्जियम के हाथों पेनल्टी शूटआउट में 3-4 से हार मिली। इस हार के साथ भारतीय टीम टूर्नामेंट में 8वें स्थान पर रही।

मैच के आखिरी मिनट तक बेल्जियम 3-2 से आगे था। खेल खत्म होने से महज 26 सेकंड पहले भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने इसे गोल में बदलकर स्कोर बराबर कर दिया और मुकाबला शूटआउट तक पहुंच गया। हालांकि शूटआउट में भारत बाजी नहीं मार सका।

हरमनप्रीत ने मैच में दो गोल किए और पूरे टूर्नामेंट में 8 गोल के साथ भारत के सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी रहे।

अभिषेक ने दिलाई शुरुआती बढ़त, बेल्जियम ने पलटा मैच

भारत ने मुकाबले की शुरुआत शानदार तरीके से की। छठे मिनट में अभिषेक ने गोल दागकर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई।

इसके बाद बेल्जियम ने तेजी से वापसी की। टीम ने 22वें और 23वें मिनट में लगातार दो गोल कर भारत पर 2-1 की बढ़त बना ली।

दूसरे हाफ की शुरुआत के कुछ ही मिनट बाद 31वें मिनट में हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदल दिया और स्कोर 2-2 हो गया। इसके बाद 47वें मिनट में बेल्जियम के डी केरपेल ने गोल कर अपनी टीम को फिर 3-2 से आगे कर दिया।

शूटआउट में भारत के दो खिलाड़ी चूके

पेनल्टी शूटआउट में भारत की ओर से शिलानंद लाकड़ा, दिलप्रीत सिंह और अभिषेक ने अपने शुरुआती तीन प्रयासों को गोल में बदला।

इसके बाद कप्तान हरमनप्रीत सिंह और सुखजीत सिंह अपने-अपने प्रयास को गोल में नहीं बदल सके। दूसरी ओर बेल्जियम के लिए टॉम बून, आर्थर डी स्लोवर, अलेक्जेंडर हेंड्रिक्स और रोमन डुवेकोट ने गोल किए।

बेल्जियम के विक्टर फोरबर्ट अपना शॉट गोल में नहीं बदल पाए, लेकिन इसके बावजूद बेल्जियम ने 4-3 से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

मनप्रीत सिंह की आंख के ऊपर लगी गेंद

मुकाबले के आखिरी क्वार्टर में भारतीय खिलाड़ी मनप्रीत सिंह को चोट लग गई। बेल्जियम के लाबुशेयर का तेज शॉट उनकी आंख के ऊपर चेहरे पर लगा, जिसके बाद उन्हें मैदान से बाहर ले जाना पड़ा।

हालांकि पेनल्टी शूटआउट के दौरान मनप्रीत मैदान पर लौटे, लेकिन उन्होंने शूटआउट में कोई प्रयास नहीं लिया।

51 साल बाद मेडल जीतने का सपना टूटा

भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में 51 साल बाद वर्ल्ड कप मेडल जीतने के लक्ष्य के साथ उतरी थी। टीम ने शुरुआती दौर में अच्छा प्रदर्शन करते हुए वेल्स को 3-1 और पाकिस्तान को 5-3 से हराया था। हालांकि इंग्लैंड के खिलाफ उसे 2-4 से हार का सामना करना पड़ा।

दूसरे राउंड में भारत का प्रदर्शन कमजोर रहा और टीम को एक भी अंक नहीं मिला। नीदरलैंड्स के खिलाफ भारत ने मैच के अंतिम 19 मिनट में तीन गोल गंवाए और मुकाबला 1-3 से हार गया।

इसके बाद अर्जेंटीना के खिलाफ भी भारतीय टीम को 3-5 से शिकस्त मिली। इस हार के साथ सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदें खत्म हो गई थीं।

अंततः बेल्जियम के खिलाफ शूटआउट में मिली हार के बाद भारत को टूर्नामेंट में 8वें स्थान से संतोष करना पड़ा।

 

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