दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सुभाष गंजीर को आय से अधिक संपत्ति के मामले में विशेष अदालत ने दोषी ठहराते हुए 4 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उन पर ₹10 हजार का जुर्माना भी लगाया है।
अदालत ने यह फैसला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चलाए गए मामले में सुनाया। कोर्ट के मुताबिक जांच में सुभाष गंजीर के पास उनकी ज्ञात आय से 88.30% अधिक संपत्ति पाई गई थी।
जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में उन्हें 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
शिकायत के बाद ACB और EOW ने शुरू की जांच
सुभाष गंजीर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान उनके अलग-अलग ठिकानों पर कार्रवाई की गई। छापेमारी में अधिकारियों को ₹8.71 लाख नकद, करीब 500 ग्राम सोने के आभूषण और संपत्तियों से संबंधित कई दस्तावेज मिले थे।
जांच एजेंसी को करीब 40 संपत्तियों और 3 मकानों से जुड़े दस्तावेज भी मिले थे। इन संपत्तियों की जांच और उनकी ज्ञात आय की तुलना के बाद आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आया।
2018 में हुई थी गिरफ्तारी
जांच पूरी होने के बाद ACB ने सुभाष गंजीर को 26 मई 2018 को गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में 5 जुलाई 2018 को उन्हें जमानत मिल गई थी।
मामले में जांच एजेंसी ने 21 जून 2018 को चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। इसके बाद 23 जुलाई 2018 को अदालत ने आरोप तय किए।
कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक, सुभाष गंजीर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ई) और 13(2) के तहत मामला चलाया गया।
आय से 88.30% ज्यादा संपत्ति का मामला
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जांच से जुड़े दस्तावेज, सबूत और गवाहों के बयान अदालत के सामने पेश किए गए।
कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर माना कि सुभाष गंजीर के पास उनकी ज्ञात आय के मुकाबले 88.30% अधिक संपत्ति थी।
इसी आधार पर अदालत ने उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी माना।
31 अगस्त को सुनाया गया फैसला
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद विशेष अदालत ने 31 अगस्त 2026 को सुभाष गंजीर के खिलाफ फैसला सुनाया।
अदालत ने उन्हें 4 साल के सश्रम कारावास के साथ ₹10 हजार के जुर्माने की सजा दी। जुर्माना नहीं भरने पर 6 महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान रखा गया है।
अभियोजन पक्ष ने पेश किए सबूत और गवाह
मामले की सुनवाई के दौरान ACB की ओर से जांच से संबंधित दस्तावेज और गवाह कोर्ट में पेश किए गए। अभियोजन पक्ष ने इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पूर्व DEO के खिलाफ अपना पक्ष रखा।
अभियोजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ममता शर्मा ने पैरवी की।
सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सुभाष गंजीर को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।