जगदलपुर: बस्तर संभाग में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने जमीनी स्तर पर समीक्षा शुरू कर दी है। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव बस्तर दौरे पर पहुंचे हैं। इस दौरान वे सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा में स्कूलों, पोटा केबिन और छात्रावासों की स्थिति का जायजा लेंगे। इसके साथ ही विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर शिक्षा से जुड़े मुद्दों और व्यवस्थाओं की समीक्षा भी करेंगे।
मंत्री के दौरे का फोकस खास तौर पर बंद स्कूलों को दोबारा शुरू करने, जर्जर भवनों की मरम्मत और शिक्षकों की उपलब्धता पर है।
बंद स्कूलों को फिर शुरू करने की तैयारी
शिक्षा मंत्री ने कहा कि अलग-अलग कारणों से बंद हुए स्कूलों को दोबारा संचालित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके साथ ही जर्जर और अति-जर्जर स्कूल भवनों की समस्या का भी समाधान किया जाएगा।
सरकार भारत सरकार के सहयोग से स्कूल भवनों के निर्माण और सुधार के लिए योजना तैयार कर रही है। आने वाले समय में बस्तर के स्कूलों में जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
पोटा केबिनों को स्थायी भवन में बदलने की योजना
बस्तर के पोटा केबिनों को लेकर भी सरकार ने बड़ी योजना तैयार करने के संकेत दिए हैं। मंत्री के मुताबिक केंद्र सरकार के सहयोग से पोटा केबिनों को पक्के और स्थायी भवनों के साथ छात्रावास सुविधाओं से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
अपने दौरे के दौरान शिक्षा मंत्री स्वयं पोटा केबिन, स्कूल और छात्रावासों का निरीक्षण करेंगे। मौके की स्थिति के आधार पर जरूरी सुधारों को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षकों के संलग्नीकरण पर अब सख्ती
शिक्षकों के संलग्नीकरण यानी मूल पदस्थापना से दूसरी जगह अस्थायी रूप से लगाए जाने को लेकर भी शिक्षा मंत्री ने अपना रुख स्पष्ट किया है।
उन्होंने कहा कि अब आवश्यक प्रक्रिया के बिना शिक्षकों का संलग्नीकरण नहीं किया जाएगा और शिक्षकों को उनके मूल स्कूल में ही पदस्थ रखने पर जोर रहेगा।
मंत्री के मुताबिक पहले बस्तर समेत प्रदेश के कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी थी। युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के जरिए ऐसे स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था करने का प्रयास किया गया है।
शिक्षक भर्ती में बस्तर को मिल सकती है प्राथमिकता
बस्तर में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए आगामी भर्तियों में क्षेत्र को प्राथमिकता देने पर भी विचार किया जा रहा है।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि आने वाली शिक्षक भर्ती में बस्तर क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता देने की योजना पर विचार चल रहा है। जरूरत पड़ने पर स्कूलों में शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए अतिथि शिक्षकों की संख्या बढ़ाने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।
स्कूलों की जमीनी स्थिति पर होगी सीधी नजर
मंत्री के दौरे को बस्तर की शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति समझने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। स्कूलों के भवन, पोटा केबिन, छात्रावास और शिक्षकों की उपलब्धता जैसे मुद्दों का मौके पर जायजा लेकर सुधार की दिशा तय की जाएगी।
सरकार का लक्ष्य बस्तर के दूरस्थ इलाकों में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और स्कूलों की व्यवस्थाओं को मजबूत करना है।