अयोध्या। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रबंधन को और अधिक व्यवस्थित, पेशेवर एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। ट्रस्ट ने पहली बार मंदिर प्रशासन में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद बनाया है और इस जिम्मेदारी के लिए भारतीय वायु सेना के पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को नियुक्त किया है।
लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर से जुड़ी प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। ट्रस्ट की उच्चस्तरीय बैठक में CEO पद के गठन और जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को मंजूरी दी गई।
पहली बार बनाया गया CEO का पद
राम मंदिर के इतिहास में पहली बार मंदिर के दैनिक और प्रशासनिक संचालन के लिए CEO की नियुक्ति की गई है। इसका उद्देश्य मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं को एक अधिक प्रभावी प्रशासनिक ढांचे के तहत संचालित करना बताया जा रहा है।
नए CEO के जिम्मे मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधाएं, भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, वीआईपी आवाजाही और प्रशासनिक समन्वय जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां आने की संभावना है।
देवरिया से निकलकर वायु सेना के शीर्ष पद तक पहुंचे जितेंद्र मिश्रा
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने भारतीय वायु सेना में लंबे समय तक सेवा दी और अपने सैन्य करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
उनका सैन्य सफर 6 दिसंबर 1986 को शुरू हुआ, जब उन्होंने एयर फोर्स एकेडमी से भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया।
करीब 37 वर्ष के सैन्य करियर में उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व
जितेंद्र मिश्रा के सैन्य करियर में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को प्रमुख पड़ाव के तौर पर देखा जाता है। इस दौरान उन्होंने भारतीय वायु सेना की महत्वपूर्ण पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी संभाली।
उनके नेतृत्व में पश्चिमी कमान ने अभियान से जुड़ी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। इसी वर्ष 30 अप्रैल को वह एयर मार्शल के पद से सेवानिवृत्त हुए।
सेना में लंबे अनुभव और रणनीतिक स्तर पर काम करने के उनके अनुभव को देखते हुए राम मंदिर के प्रशासन की कमान उनके हाथों में देना महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
चढ़ावा चोरी की घटना के बाद प्रशासन पर बढ़ा जोर
राम मंदिर परिसर में 7 जून को सामने आई चढ़ावा चोरी की घटना के बाद मंदिर की सुरक्षा, निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद ट्रस्ट की ओर से प्रबंधन को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने पर जोर दिया गया।
CEO की नियुक्ति को इसी व्यापक प्रशासनिक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि मंदिर प्रशासन में नई व्यवस्था किस तरह लागू होगी, इसका विस्तृत ढांचा आगे स्पष्ट किया जाएगा।
सुरक्षा से लेकर भीड़ प्रबंधन तक बढ़ेगा फोकस
अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के बाद श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। ऐसे में मंदिर प्रबंधन के सामने सुरक्षा, कतार व्यवस्था, वीआईपी मूवमेंट और भीड़ नियंत्रण जैसी चुनौतियां भी महत्वपूर्ण हो गई हैं।
पूर्व सैन्य अधिकारी की नियुक्ति से मंदिर प्रशासन में अनुशासन, समन्वय और संकट प्रबंधन पर अधिक जोर दिए जाने की उम्मीद है।
इसके अलावा वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में भी CEO की भूमिका अहम हो सकती है।
पेशेवर प्रबंधन की ओर राम मंदिर ट्रस्ट का कदम
राम मंदिर का प्रबंधन अब केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। लाखों श्रद्धालुओं की नियमित आवाजाही, सुरक्षा व्यवस्था, दान और चढ़ावे का प्रबंधन, सुविधाओं का विस्तार तथा बड़े आयोजनों की तैयारी के लिए मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत है।
ऐसे में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को पहला CEO नियुक्त करना ट्रस्ट की ओर से मंदिर प्रशासन को अधिक पेशेवर और जवाबदेह स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।