रायपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत उचित मूल्य की दुकानों में चावल पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बारदानों को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। इन बारदानों का इस्तेमाल सरकार बाद में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान करती है। इसके लिए उचित मूल्य दुकानदारों को पुराने बारदाने विभाग को वापस करने के निर्देश दिए गए हैं और प्रत्येक बारदाने के बदले 25 रुपये का भुगतान भी किया जाता है।
इसके बावजूद कई राशन दुकानों से बारदाने वापस नहीं किए जा रहे हैं। इसका सीधा असर धान खरीदी के समय पड़ता है। पुराने बारदानों की उपलब्धता कम होने पर विभाग को बाजार से नए बारदाने खरीदने पड़ते हैं, जिनकी कीमत पुराने बारदानों की तुलना में काफी ज्यादा होती है। इससे सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की बात सामने आ रही है।
70 फीसदी बारदाने भी वापस नहीं कर रहे कई दुकानदार
जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में उचित मूल्य दुकान संचालक उपलब्ध बारदानों का 70 फीसदी हिस्सा भी विभाग को वापस नहीं कर रहे हैं। इसके चलते धान खरीदी के सीजन में बारदानों की कमी पैदा हो जाती है और विभाग को नए बारदाने खरीदने पड़ते हैं।
सरकार पुराने बारदाने उचित मूल्य दुकानों से 25 रुपये प्रति नग की दर से वापस लेती है, जबकि नए बारदानों की खरीद पर इससे कहीं अधिक राशि खर्च करनी पड़ती है।
‘चूहे खा गए’ और ‘फट गए’ जैसे दिए जाते हैं बहाने
बारदाने वापस नहीं करने वाले कई दुकान संचालकों की ओर से कथित तौर पर अलग-अलग कारण बताए जाते हैं। इनमें बारदाने फट जाने या चूहों द्वारा खराब कर दिए जाने जैसी बातें शामिल हैं।
दुकानदारों का कहना होता है कि खराब होने के बाद बारदाने इस्तेमाल लायक नहीं रह जाते, इसलिए उन्हें कम कीमत पर बेच दिया जाता है। वहीं, यह भी आरोप है कि बारदानों की वापसी और उनके वास्तविक इस्तेमाल की जांच की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने के कारण ऐसे मामलों में कार्रवाई मुश्किल हो जाती है।
रायपुर में 720 राशन दुकानें, 251 ने नहीं लौटाया एक भी बारदाना
रायपुर जिले में कुल 720 उचित मूल्य की दुकानें संचालित हैं। इनमें 298 दुकानें शहरी क्षेत्र में और 422 दुकानें ग्रामीण इलाकों में हैं।
सहकारी विपणन संघ मर्यादित रायपुर के अधिकारियों के अनुसार, 1 अप्रैल से 31 अगस्त के बीच इन दुकानों के माध्यम से PDS चावल पहुंचाने के लिए करीब 10 लाख बारदाने भेजे गए।
इनमें से अब तक सिर्फ 5 लाख बारदाने ही विभाग को वापस मिले हैं। यानी करीब 5 लाख बारदाने अभी वापस नहीं किए गए हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, 720 दुकानों में से 469 दुकानदारों ने मिलकर करीब 5 लाख बारदाने लौटाए, जबकि 251 दुकानदारों ने एक भी बारदाना वापस नहीं किया।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इन दुकानों में बचे हुए बारदाने कहां हैं। संभावना जताई जा रही है कि कुछ बारदाने दुकानों में रखे हो सकते हैं, जबकि कुछ को बाजार में बेच दिए जाने की आशंका है।
नया बारदाना खरीदने में 50 से 55 रुपये तक खर्च
पुराने बारदानों की वापसी नहीं होने से सरकार को नए बारदाने खरीदने में अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ती है। रायपुर में करीब 10 लाख बारदाने वितरित किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, नए बारदाने की खरीद पर करीब 50 से 55 रुपये प्रति बारदाना खर्च होता है। इसके मुकाबले PDS दुकानों से पुराने बारदाने 25 रुपये प्रति नग की दर से वापस लिए जाते हैं।
इस तरह पुराने बारदाने उपलब्ध होने पर विभाग को अपेक्षाकृत कम कीमत में सामग्री मिल जाती है, लेकिन उनकी कमी होने पर नए बारदानों के लिए लगभग दोगुनी राशि खर्च करनी पड़ती है।
बाजार में 10 से 20 रुपये में बिकता है पुराना बारदाना
बाजार में पुराने बारदानों की कीमत सरकारी खरीद दर से भी कम बताई जा रही है। पुराने बारदाने खरीदने वाले एक दुकानदार ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि इनकी कीमत उनकी क्वालिटी और स्थिति के आधार पर तय होती है।
उसके अनुसार, बाजार में पुराने बारदाने करीब 10 से 20 रुपये प्रति नग तक बिकते हैं और वह भी इसी दायरे में बारदाने खरीदता है।
धान खरीदी के समय बढ़ जाती है बारदानों की जरूरत
PDS के जरिए चावल वितरण में इस्तेमाल होने वाले बारदानों की वापसी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन्हें बाद में धान खरीदी में इस्तेमाल किया जाता है। यदि समय पर पर्याप्त पुराने बारदाने वापस नहीं आते हैं तो धान खरीदी के दौरान विभाग को नए बारदाने खरीदने पड़ते हैं।
ऐसे में बारदाना वापसी की व्यवस्था और इसकी निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर रायपुर जिले में 251 दुकानदारों द्वारा एक भी बारदाना वापस नहीं किए जाने का आंकड़ा व्यवस्था की निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।