IPS Ratanlal Dangi Case: छत्तीसगढ़ के निलंबित IPS अधिकारी रतनलाल डांगी से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले में हाईकोर्ट ने राज्य शासन को जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट के निर्देश के बावजूद अब तक जवाब और जांच से संबंधित रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई।
जस्टिस ए.के. प्रसाद की बेंच ने शासन को एक सप्ताह के भीतर शिकायत पर की गई कार्रवाई और जांच से जुड़ी जानकारी शपथ पत्र के साथ अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तय समय में जवाब दाखिल नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ सकता है।
इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
जांच प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
मामले में आरोप लगाने वाली महिला सब इंस्पेक्टर की पत्नी ने जांच की मौजूदा प्रक्रिया पर भी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी, विशेष रूप से महिला IAS अधिकारी, से कराने की मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट की ओर से 12 अगस्त 2026 को दिए गए निर्देश के बावजूद शासन ने अब तक मांगी गई आवश्यक जानकारी और रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत नहीं की है।
7 दिन का मिला अंतिम मौका
हाईकोर्ट ने शासन को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने कहा है कि शिकायत पर अब तक हुई कार्रवाई का पूरा विवरण शपथ पत्र के जरिए पेश किया जाना चाहिए।
यदि तय अवधि में रिपोर्ट या जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी को 29 सितंबर की सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित होना होगा।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू ने पक्ष रखा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला कोरबा की एक महिला योग प्रशिक्षक द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा है। महिला ने निलंबित IPS अधिकारी रतनलाल डांगी पर ऑनलाइन योग क्लास के दौरान कथित तौर पर अश्लील बातचीत करने और वीडियो कॉल पर आपत्तिजनक व्यवहार करने के आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कथित तौर पर उसकी बात नहीं मानने पर डांगी ने उसके सब इंस्पेक्टर पति को झूठे आपराधिक मामले में फंसाने और बेहद संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्र में ट्रांसफर कराने की धमकी दी।
हालांकि, ये सभी आरोप हैं और मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा।
अक्टूबर 2025 में DGP से की थी शिकायत
महिला के मुताबिक, उसने 15 अक्टूबर 2025 को कथित घटनाओं से जुड़े सबूतों के साथ तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी।
इसके बाद मार्च 2026 में रतनलाल डांगी को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई। शिकायत की जांच के लिए DGP की ओर से तत्कालीन IG आनंद छाबड़ा और तत्कालीन DIG मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था।
जांच अधिकारियों की नियुक्ति पर भी आपत्ति
याचिकाकर्ता ने जांच अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जांच पैनल में शामिल एक अधिकारी आरोपी के समान रैंक के थे, जबकि दूसरी अधिकारी उनसे कनिष्ठ थीं।
इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मौजूदा जांच अधिकारियों को हटाने और मामले की जांच किसी वरिष्ठ IAS अधिकारी, खासतौर पर महिला IAS अधिकारी, से कराने की मांग की है।
अब 29 सितंबर को होगी सुनवाई
हाईकोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब शासन को एक सप्ताह के भीतर जवाब और कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज अदालत में पेश करने होंगे। इसके बाद 29 सितंबर को होने वाली सुनवाई में कोर्ट मामले की आगे की स्थिति पर विचार करेगा।
फिलहाल अदालत की नजर इस बात पर है कि शासन तय समय सीमा के भीतर जांच और शिकायत पर की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी प्रस्तुत करता है या नहीं।