बलौदा बाजार। शिक्षक को समाज में हमेशा से सम्मान और मार्गदर्शक का दर्जा मिला है। एक सच्चा शिक्षक केवल किताबों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों का सामना करना भी सिखाता है। शिक्षक दिवस के मौके पर बलौदा बाजार जिले से एक ऐसे शिक्षक की कहानी सामने आई है, जिनकी आंखों में रोशनी नहीं है, लेकिन उनके ज्ञान और हौसले ने सैकड़ों विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा दी है।
किसान परिवार से शुरू हुआ संघर्ष का सफर
बलौदा बाजार जिले के ग्राम दतान में किसान परिवार में जन्मे उत्तम कुमार वर्मा जन्म से ही दृष्टिबाधित हैं। परिवार की परिस्थितियां भी आसान नहीं थीं। उनके दो अन्य भाई भी दिव्यांग हैं। आर्थिक चुनौतियों और सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तम ने कभी अपनी स्थिति को अपनी मंजिल के रास्ते की दीवार नहीं बनने दिया। उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे मजबूत सहारा बनाया और लगातार आगे बढ़ते रहे।
रायपुर से दिल्ली और चंडीगढ़ तक पहुंची पढ़ाई
उत्तम की प्रारंभिक शिक्षा रायपुर के संतोषी नगर मठ पुरैना स्थित दृष्टिबाधित विद्यालय से हुई। आगे पढ़ने की चाह उन्हें दिल्ली ले गई। वहां उन्होंने हरिवंश कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन किया।
इसके बाद भी उन्होंने पढ़ाई का सफर नहीं रोका। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, पंजाब से इतिहास विषय में पीएचडी की उपाधि हासिल कर उन्होंने साबित किया कि शारीरिक चुनौतियां प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने छोटी पड़ जाती हैं।
चार साल से विद्यार्थियों को दे रहे शिक्षा
उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद उत्तम कुमार वर्मा ने शिक्षक के रूप में अपनी नई पारी शुरू की। पिछले करीब चार वर्षों से वे विद्यार्थियों को इतिहास पढ़ा रहे हैं। उनके लिए शिक्षण सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ी के प्रति जिम्मेदारी है। वे बच्चों को पढ़ाई के साथ यह संदेश भी देते हैं कि जीवन में कठिन परिस्थितियां आएं तो उनसे घबराने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। उनका अपना जीवन ही विद्यार्थियों के लिए संघर्ष और सफलता की मिसाल बन चुका है।
ज्ञान के साथ संगीत के सुर भी सिखाते हैं
उत्तम कुमार वर्मा की प्रतिभा सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं है। उन्हें संगीत में भी गहरी रुचि है। वे हारमोनियम वादन में निपुण हैं और धार्मिक भजनों के साथ रामायण की चौपाइयों का गायन भी करते हैं। खास बात यह है कि वे विद्यार्थियों को संगीत से भी जोड़ते हैं। इस तरह वे बच्चों के भीतर शिक्षा के साथ रचनात्मकता और सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास करते हैं।
मंच संवाद में हुआ सम्मान
उत्तम कुमार वर्मा के संघर्ष, उपलब्धियों और शिक्षा के प्रति समर्पण को देखते हुए हरिभूमि आईएनएच न्यूज़ के मंच संवाद कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित भी किया गया। यह सम्मान केवल एक शिक्षक की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस संघर्ष और जज्बे का सम्मान है, जिसने दृष्टिबाधित होने के बावजूद उत्तम को उच्च शिक्षा से लेकर पीएचडी तक पहुंचाया और आज उन्हें सैकड़ों विद्यार्थियों का मार्गदर्शक बनाया है।
आंखों की रोशनी नहीं, हौसले की रोशनी है पहचान
उत्तम कुमार वर्मा की कहानी यह साबित करती है कि जिंदगी में सफलता हासिल करने के लिए केवल परिस्थितियों का अनुकूल होना जरूरी नहीं है। मजबूत इरादे और लगातार मेहनत के दम पर मुश्किल से मुश्किल रास्ता भी पार किया जा सकता है।
एक छोटे से गांव के किसान परिवार से निकलकर उच्च शिक्षा हासिल करने और फिर शिक्षक बनकर सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा देने तक का उनका सफर निश्चित तौर पर प्रेरणादायक है। शिक्षक दिवस पर उत्तम कुमार वर्मा जैसे शिक्षक को सलाम, जो खुद संघर्षों से लड़कर आगे बढ़े और अब अपनी शिक्षा व अनुभव से नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का हौसला दे रहे हैं।