UP Electricity News: उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करने और डिस्कॉम की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों का असर अब सरकारी आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की बिजली वितरण हानि में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, वितरण हानि 20.63 प्रतिशत से घटकर 13.04 प्रतिशत रह गई है।
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) की ओर से की गई सख्त निगरानी, डेटा आधारित समीक्षा और फीडर स्तर पर जवाबदेही तय किए जाने से बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार हुआ है। इसके साथ ही बिजली चोरी पर नियंत्रण और बकाया राजस्व की वसूली में भी तेजी आई है।
लाभकारी फीडरों की संख्या में हुआ इजाफा
कृषि फीडरों को अलग रखने पर प्रदेश में कुल फीडरों की संख्या बढ़कर 21,463 हो गई है। इनमें लाभकारी फीडरों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।
आंकड़ों के अनुसार, पहले जहां लाभकारी फीडरों की संख्या 5,772 थी, वहीं अब यह बढ़कर 8,104 हो गई है। यानी कुल फीडरों में लाभकारी फीडरों की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
पश्चिमांचल डिस्कॉम का प्रदर्शन सबसे बेहतर
लाभकारी फीडरों के मामले में प्रदेश के अलग-अलग डिस्कॉम के प्रदर्शन में भी अंतर देखने को मिला है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम 53 प्रतिशत लाभकारी फीडरों के साथ सबसे आगे रहा।
इसके बाद केस्को में 39 प्रतिशत फीडर लाभकारी रहे। वहीं दक्षिणांचल और मध्यांचल डिस्कॉम में यह आंकड़ा 37-37 प्रतिशत रहा। पूर्वांचल डिस्कॉम में लाभकारी फीडरों की हिस्सेदारी 22 प्रतिशत दर्ज की गई।
हाई लॉस क्लस्टर मॉडल से ₹654 करोड़ की वसूली
बिजली चोरी पर रोक लगाने और राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए UPPCL ने ‘हाई लॉस क्लस्टर मॉडल’ के तहत विशेष अभियान चलाया। इस अभियान में 703 क्लस्टर, 1,703 फीडर और 42.21 लाख उपभोक्ताओं को शामिल किया गया।
अभियान के दौरान बकाया बिजली बिलों की वसूली पर विशेष जोर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप कुल 654 करोड़ 31 लाख रुपये की बकाया राशि वसूल की गई।
साथ ही अभियान के तहत 1,01,548 नए वैध बिजली कनेक्शन जारी किए गए। इससे अनधिकृत बिजली इस्तेमाल को कम करने में भी मदद मिली।
हाई लॉस फीडरों में भी तेजी से घटा नुकसान
प्रदेश के अत्यधिक नुकसान वाले फीडरों पर चलाए गए अभियानों से भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। ललितपुर के तालबेहट टाउन-2 में एटीएंडसी हानि 63 प्रतिशत से घटकर महज 11 प्रतिशत रह गई।
इसी तरह कासगंज के मणिकापुर सीरी में नुकसान 87 प्रतिशत से घटकर 53 प्रतिशत और मथुरा के राल में 83.62 प्रतिशत से घटकर 47.82 प्रतिशत हो गया।
वहीं आगरा, मथुरा, चित्रकूट, राठ और कोसी के टॉप-10 हाई लॉस फीडरों में कुल घाटा 22.53 करोड़ रुपये से घटकर 17.89 करोड़ रुपये रह गया। यह करीब 21 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है।
फीडर स्तर की निगरानी से मजबूत हुआ वित्तीय अनुशासन
विद्युत विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बिजली वितरण में आया यह बदलाव सरकार और UPPCL प्रबंधन की लगातार समीक्षा और सख्त निगरानी का परिणाम है। फीडर स्तर पर जिम्मेदारी तय किए जाने से अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों के बीच जवाबदेही बढ़ी है।
दैनिक मॉनिटरिंग और डेटा के आधार पर प्रदर्शन की समीक्षा से बिजली चोरी, लाइन लॉस और बकाया वसूली जैसे मामलों पर तेजी से कार्रवाई संभव हुई है। इसका असर बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर भी पड़ा है।
सरकार के इन प्रयासों से एक ओर जहां बिजली वितरण व्यवस्था में वित्तीय अनुशासन बेहतर हुआ है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को अधिक व्यवस्थित और निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने की दिशा में भी मदद मिली है।