Copper Price: दुनिया के कमोडिटी बाजार में तांबे की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर तीन महीने के कॉपर कॉन्ट्रैक्ट का भाव बढ़कर 14,533 डॉलर प्रति टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। साल 2026 में अब तक कॉपर की कीमत में करीब 16 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है।
7 सितंबर के LME के आधिकारिक भाव के मुताबिक, कैश कॉपर करीब 14,539-14,540 डॉलर प्रति टन के स्तर पर रहा। वहीं तीन महीने वाला कॉपर कॉन्ट्रैक्ट 14,443-14,448 डॉलर प्रति टन के आसपास कारोबार करता नजर आया।
सप्लाई में कमी से कॉपर को मिल रहा सपोर्ट
कॉपर की कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण कई प्रमुख बाजारों में घटता हुआ स्टॉक माना जा रहा है। अमेरिका के बाहर उपलब्ध कॉपर की मात्रा में कमी के संकेत मिल रहे हैं। इसके अलावा डॉलर में कमजोरी और फंड्स की खरीदारी ने भी धातु की कीमतों को मजबूती दी है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की कमोडिटी रिसर्च एनालिस्ट परीन पटनी के मुताबिक, बाजार का ध्यान अब कॉपर की बढ़ती सप्लाई कमी पर ज्यादा केंद्रित हो गया है। उनके अनुसार, मौजूदा परिस्थितियां कॉपर के लिए मजबूत दिखाई दे रही हैं।
LME के वेयरहाउस सिस्टम में करीब 51 फीसदी कैंसिल्ड वारंट बताए जा रहे हैं। इसका अर्थ है कि आने वाले हफ्तों में 1.21 लाख टन से अधिक कॉपर वेयरहाउस से बाहर निकाला जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो एक्सचेंज पर उपलब्ध स्टॉक और कम हो सकता है।
चीन में कॉपर इन्वेंटरी 85% तक कम
कॉपर की सप्लाई को लेकर चिंता सिर्फ LME तक सीमित नहीं है। चीन में भी एक्सचेंज स्टॉक में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज (SHFE) में कॉपर इन्वेंटरी घटकर करीब 63 हजार टन रह गई है। यह मार्च के मध्य की तुलना में लगभग 85 फीसदी कम है। इसे जनवरी 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है।
SHFE में मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट की कीमत का आगे की अवधि वाले कॉन्ट्रैक्ट से ज्यादा होना भी तत्काल सप्लाई की तंगी का संकेत माना जा रहा है। LME में भी इसी तरह की स्थिति दिखाई दे रही है। बाजार की भाषा में यह स्थिति कॉपर की तत्काल उपलब्धता पर दबाव की ओर इशारा करती है।
अमेरिका और चीन के स्टॉक में क्यों है अंतर?
अमेरिका में कॉपर का स्टॉक फिलहाल अपेक्षाकृत ऊंचा है, जबकि चीन और LME के सिस्टम में इन्वेंटरी लगातार कम हो रही है। बाजार विशेषज्ञ इस अंतर को काफी महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह स्थिति संकेत देती है कि अमेरिका के बाहर कॉपर की उपलब्धता तेजी से सीमित हो रही है। इसके अलावा संभावित टैरिफ की आशंका ने भी कॉपर की कीमतों को सपोर्ट दिया है।
AI और EV से बढ़ सकती है तांबे की मांग
कॉपर में तेजी की कहानी सिर्फ मौजूदा स्टॉक की कमी तक सीमित नहीं है। आने वाले वर्षों में इसकी मांग बढ़ने की उम्मीद भी कीमतों को सपोर्ट कर सकती है।
AI डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), पावर ग्रिड के विस्तार और बढ़ते इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए बड़ी मात्रा में कॉपर की जरूरत होती है। जैसे-जैसे इन सेक्टर्स में निवेश और विस्तार बढ़ेगा, वैसे-वैसे तांबे की खपत में भी इजाफा होने की संभावना है।
तेजी के बाद मुनाफावसूली का जोखिम
कॉपर की कीमतों में लगातार तेज उछाल के बाद निकट अवधि में कुछ निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं। ऐसे में शॉर्ट टर्म में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में कॉपर की सप्लाई को लेकर दबाव बना रह सकता है। अगर इन्वेंटरी का स्तर कम बना रहता है और AI, EV तथा इलेक्ट्रिफिकेशन जैसे क्षेत्रों से मांग मजबूत रहती है, तो कॉपर की कीमतों में गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है।
कुल मिलाकर, कम होता ग्लोबल स्टॉक और भविष्य में बढ़ने वाली मांग कॉपर की कीमतों के लिए बड़े सपोर्ट फैक्टर बने हुए हैं। हालांकि, रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद निवेशकों को शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव और मुनाफावसूली के जोखिम को भी ध्यान में रखना होगा।