भिलाई इस्पात संयंत्र की इस्पात गलन शाला-3 में विगत दिनों राजभाषा कार्यशाला के आयोजन के साथ ‘राजभाषा पखवाड़ा-2026’ का शुभारंभ उत्साहपूर्ण एवं गरिमामय वातावरण में किया गया। विभाग द्वारा इस आयोजन का यह लगातार दूसरा वर्ष है। पखवाड़े के दौरान नोटशीट लेखन रूपांतरण, निबंध लेखन, स्लोगन लेखन, स्वरचित कविता वाचन, तात्कालिक भाषण, क्विज़ आदि विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रम के आरंभ में इस्पात गलन शाला-3 के मुखिया, मुख्य महाप्रबंधक एसएमएस 3 श्री त्रिभुवन बैठा के करकमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन किया गया। तत्पश्चात राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। अपने उद्बोधन में श्री त्रिभुवन बैठा ने अपने व्यक्तिगत जीवन में हिंदी के प्रयोग एवं महत्व को साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार हिंदी तथा अंग्रेज़ी के शब्दकोष की सहायता से उन्होंने दोनों भाषाओँ पर अपनी पकड़ मज़बूत बनाई। इस अवसर पर उप प्रबंधक, (संपर्क व प्रशासन – राजभाषा) श्री जितेन्द्र दास मानिकपुरी ने राजभाषा के बेहतर कार्यान्वयन हेतु देश के विभिन्न प्रदेशों एवं केन्द्र शासित क्षेत्रों के ‘क’ ‘ख’ एवं ‘ग़’ क्षेत्रों के रूप में चिह्नांकन के विषय में बताया और राजभाषा के सांविधिक प्रावधानों की जानकारी देने के साथ ही संसदीय राजभाषा समिति द्वारा निरीक्षण के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
सर्वप्रथम उप प्रबंधक (विद्युत) सुश्री अर्चना अतिका सिंह ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए बताया कि, पखवाड़ा के उदघाटन के अवसर पर आयोजित कार्यशाला में नोटशीट लेखन की प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा तथा विभिन्न माध्यमों से समस्त कार्मिकों को राजभाषा का प्रयोग करने जागरूक किया जाएगा।
संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन इस्पात गलन शाला-3 के महाप्रबंधक एवं राजभाषा अधिकारी श्री उमाशंकर परगनिहा ने किया। उन्होंने राजभाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजभाषा केवल संप्रेषण का माध्यम ही नहीं, बल्कि हमारे स्वाभिमान और देश के गौरव का प्रतीक है। राजभाषा पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य हमारे मन में सहज रूप से आने वाले हिंदी के शब्दों एवं भावों को व्यावहारिक रूप प्रदान करना और कार्यालयीन कार्यों में उनका उपयोग करना है। उन्होंने भिलाई इस्पात संयंत्र में राजभाषा के उपयोग एवं कार्यान्वयन के लिए जारी किए गए विभिन्न ‘जाँच-बिंदुओं’ की जानकारी दी तथा कार्यस्थल पर इनके प्रभावी अनुपालन के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि कार्यालयीन कार्यों में राजभाषा का अधिकाधिक एवं सहज प्रयोग हमारी कार्य संस्कृति का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजभाषा के प्रति सम्मान और उसका व्यवहारिक प्रयोग हम सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। हिंदी को कार्यव्यवहार में अपनाकर हम न केवल राजभाषा नीति के उद्देश्यों को साकार कर सकते हैं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने गौरव एवं स्वाभिमान को भी अभिव्यक्त कर सकते हैं।