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CBSE Teacher Training: AI के दौर में बदलेगा पढ़ाने का तरीका, अब छात्रों की सोच और तर्क पर रहेगा फोकस

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रायपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल ने शिक्षा के पारंपरिक तरीकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। अब विद्यार्थी किसी भी विषय से जुड़े सवाल का जवाब कुछ ही सेकंड में AI टूल्स की मदद से हासिल कर सकते हैं। ऐसे में शिक्षक की भूमिका केवल किताब का पाठ समझाने या प्रश्नों के उत्तर बताने तक सीमित नहीं रहेगी।

अब ज्यादा जोर इस बात पर होगा कि विद्यार्थी AI से मिले जवाब को कितनी अच्छी तरह समझता है, उसकी सही-गलत जानकारी को परख सकता है या नहीं और उस विषय पर खुद तर्क करने में कितना सक्षम है।

इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के शिक्षक प्रशिक्षण के लिए ‘Computational Thinking and Understanding AI’ को प्रमुख विषय बनाया है।

नवंबर में होगा राष्ट्रीय शिक्षक सम्मेलन

CBSE की इस पहल के तहत नवंबर में राष्ट्रीय शिक्षक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें कंप्यूटेशनल थिंकिंग और AI को कक्षा शिक्षण से जोड़ने के तरीकों पर चर्चा होगी।

सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षकों को तेजी से बदलती तकनीक और शिक्षा के नए तौर-तरीकों के लिए तैयार करना है। बोर्ड का फोकस केवल शिक्षकों और विद्यार्थियों को AI टूल चलाना सिखाने पर नहीं है, बल्कि तकनीक के साथ तार्किक सोच, समस्या समाधान और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने पर भी है।

तीसरी से आठवीं कक्षा तक बढ़ेगा फोकस

CBSE की योजना में तीसरी से आठवीं कक्षा तक कंप्यूटेशनल थिंकिंग को सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

इसके तहत विद्यार्थियों को किसी जटिल समस्या को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर उसे समझने और फिर चरणबद्ध तरीके से समाधान निकालने का अभ्यास कराया जाएगा।

इस तरीके से बच्चों में केवल रटकर जवाब देने के बजाय किसी समस्या के पीछे की प्रक्रिया को समझने और उसका तार्किक समाधान खोजने की आदत विकसित करने की कोशिश होगी।

हर विद्यार्थी के हिसाब से तैयार हो सकती है पढ़ाई

AI आधारित टूल्स का इस्तेमाल विद्यार्थियों की सीखने की गति और उनकी कमजोरियों को पहचानने में भी किया जा सकता है। इससे शिक्षकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किस छात्र को किस विषय या अवधारणा पर अतिरिक्त अभ्यास की जरूरत है।

भविष्य में एक पूरी कक्षा के लिए एक जैसी गतिविधि या अभ्यास कराने के बजाय विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार सीखने की सामग्री तैयार करने पर ज्यादा जोर दिया जा सकता है।

इससे तेज गति से सीखने वाले छात्रों और अतिरिक्त सहायता की जरूरत वाले विद्यार्थियों, दोनों के लिए पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने का अवसर मिलेगा।

AI के दौर में गृहकार्य का तरीका भी बदलना जरूरी

AI टूल्स की आसान उपलब्धता ने पारंपरिक होमवर्क को लेकर भी नई चुनौती पैदा कर दी है। विद्यार्थी निबंध, सामान्य प्रश्नों के उत्तर या प्रोजेक्ट का बड़ा हिस्सा कुछ ही समय में AI की मदद से तैयार कर सकते हैं।

ऐसे में स्कूलों को गृहकार्य और प्रोजेक्ट की प्रकृति में बदलाव करना पड़ सकता है। ऐसे असाइनमेंट तैयार करने की जरूरत होगी, जिनमें विद्यार्थी को केवल तैयार जानकारी लिखने के बजाय खुद सोचना, विश्लेषण करना, तर्क देना और समस्या का समाधान निकालना पड़े।

यानी AI के दौर में शिक्षा का लक्ष्य केवल सही उत्तर हासिल करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होगा कि विद्यार्थी यह समझ सके कि उत्तर सही क्यों है और उसका इस्तेमाल किस परिस्थिति में किया जाना चाहिए।

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