रायपुर: छत्तीसगढ़ में छात्राओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान से जुड़े मुद्दे को लेकर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अहम पहल की है। आयोग ने प्रदेश के सरकारी और निजी कन्या एवं सहशिक्षा विद्यालयों के साथ-साथ आवासीय बालिका छात्रावासों और आश्रमों में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन उपलब्ध कराने की अनुशंसा की है।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने 10 सितंबर 2026 को यह अनुशंसा की। जिलों में स्कूलों के निरीक्षण के दौरान आयोग के सामने यह बात आई कि माहवारी के दौरान छात्राओं को जरूरत पड़ने पर स्कूल परिसर में आसानी से सेनेटरी पैड उपलब्ध नहीं हो पाते।
आयोग ने इसे केवल सुविधा से जुड़ा विषय न मानकर किशोरियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमा से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है।
शौचालय परिसर में लगाने की सिफारिश
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के अनुसार, प्रत्येक कन्या और सहशिक्षा विद्यालय में छात्राओं की आवश्यकता को देखते हुए सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन जैसी सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
मशीन को विद्यालय के शौचालय क्षेत्र में स्थापित करने की अनुशंसा की गई है, ताकि छात्राओं को आवश्यकता के समय बिना परेशानी के सेनेटरी पैड मिल सकें।
आयोग ने यह भी कहा है कि छात्राओं को जरूरत के समय सहयोग और उचित मार्गदर्शन देने के लिए महिला शिक्षिका या अधीक्षिका की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
खास तौर पर आवासीय बालिका छात्रावासों और आश्रमों में इस सुविधा को महत्वपूर्ण माना गया है, जहां छात्राओं के लिए ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता और भी अधिक हो सकती है।
तीन सरकारी विभागों को भेजी गई अनुशंसा
सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन लगाने को लेकर आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग और आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव/सचिव को अनुशंसा भेजी है।
आयोग ने इन विभागों से प्रदेश के सभी कन्या एवं सहशिक्षा विद्यालयों, आवासीय बालिका छात्रावासों और आश्रमों में उपलब्ध मौजूदा सुविधाओं का सर्वेक्षण कराने की बात कही है।
इसके बाद जहां आवश्यक हो, वहां जल्द से जल्द सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन सहित जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की अनुशंसा की गई है।
मशीनों की देखरेख की जिम्मेदारी भी तय करने की मांग
आयोग ने केवल मशीनें लगाने तक सीमित न रहते हुए उनके नियमित संचालन और रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है।
इसके लिए संबंधित विद्यालय प्रबंधन और छात्रावास अधीक्षक को जिम्मेदारी सौंपने की अनुशंसा की गई है, ताकि मशीनें खराब न रहें और छात्राओं को जरूरत के समय लगातार सुविधा मिलती रहे।
माहवारी के कारण पढ़ाई प्रभावित न हो
बाल अधिकार संरक्षण आयोग का कहना है कि किशोरियों को मासिक धर्म के दौरान जरूरी सुविधाओं के अभाव में असहज परिस्थितियों से गुजरना नहीं पड़ना चाहिए। ऐसी समस्याओं के कारण उनकी शिक्षा, विद्यालय में नियमित उपस्थिति और आत्मसम्मान प्रभावित नहीं होना चाहिए।
आयोग की इस पहल का उद्देश्य छात्राओं के लिए स्कूलों और छात्रावासों में ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां उन्हें स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल से जुड़ी जरूरी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें।