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बिलासपुर जोन के 110KM रेल रूट पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग शुरू:सक्ती–झाराडीह–खरसिया और हर्री–वेंकटनगर–निगौरा खंड भी जुड़े, अब एक ही ट्रैक पर चलेंगी कई ट्रेनें

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दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर जोन में 110 किलोमीटर रेल रूट पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम शुरू हो गया है। रेलवे के मुताबिक, अप्रैल से नवंबर के बीच 13 रेलखंडों में यह काम पूरा किया गया है। इसे 235 किलोमीटर दोहरी रेल लाइन के बराबर माना गया है। इस तकनीक से एक ही रेलखंड पर पहले की तुलना में ज्यादा ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। इससे ट्रेनों का इंतजार कम होगा और परिचालन में तेजी आएगी।

बिलासपुर मंडल के सक्ती-झाराडीह-खरसिया खंड में 2 नवंबर और हर्री-वेंकटनगर-निगौरा खंड में 5 नवंबर को ऑटोमैटिक सिग्नलिंग शुरू की गई।

हावड़ा-मुंबई और बिलासपुर-कटनी रूट पर मिलेगी सुविधा

ये दोनों रेलखंड हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलमार्ग और बिलासपुर-कटनी रेलमार्ग के बिलासपुर-अनूपपुर हिस्से में आते हैं। इन व्यस्त मार्गों पर यात्री ट्रेनों के साथ कोयला, इस्पात, सीमेंट और बिजली उद्योगों से जुड़ी मालगाड़ियां भी चलती हैं।

अब एक ही रेलखंड पर चल सकेंगी कई ट्रेनें

पारंपरिक सिग्नलिंग व्यवस्था में दो स्टेशनों के बीच एक समय में एक ही ट्रेन चलती है। अगली ट्रेन को पहली ट्रेन के अगले स्टेशन पहुंचने तक इंतजार करना पड़ता है।

ऑटोमैटिक सिग्नलिंग में दो स्टेशनों के बीच के रेलखंड को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर सिग्नल लगाए जाते हैं। ट्रेन के आगे बढ़ने पर सिग्नल अपने आप बदलते हैं। इससे एक ही रेलखंड पर कई ट्रेनें एक के बाद एक चल सकती हैं।

इस सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल पटरी पर ट्रेनों की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं। आगे का रास्ता खाली होने पर ही ट्रेन को आगे बढ़ने का संकेत मिलता है। इससे मानवीय निर्भरता भी कम होती है।

सक्ती-झाराडीह-खरसिया में 32 नए सिग्नल लगाए

बिलासपुर मंडल के हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलमार्ग पर स्थित सक्ती-झाराडीह-खरसिया खंड चार रेल लाइनों वाला व्यस्त रूट है। इसकी लंबाई 16 रूट किलोमीटर है, जिसे 32 किलोमीटर दोहरी लाइन के बराबर माना गया है।

इस खंड में 32 नए ऑटोमैटिक सिग्नल लगाए गए हैं। पूरी व्यवस्था को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है। ट्रेनों की स्थिति की सटीक जानकारी के लिए मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर (MSDAC) के 180 डिटेक्शन पॉइंट लगाए गए हैं।

सिस्टम की निगरानी के लिए 1024 बिट क्षमता वाला नया डेटालॉगर लगाया गया है। उपकरणों की सुरक्षा के लिए फायर अलार्म, सिग्नलिंग और क्वाड केबल की निगरानी के लिए अर्थ लीकेज डिटेक्टर (ELD) और बिजली आपूर्ति के लिए ऑटोमैटिक फ्यूज चेंजओवर सिस्टम भी लगाया गया है।

हर्री-वेंकटनगर-निगौरा में भी शुरू हुई व्यवस्था

बिलासपुर मंडल के बिलासपुर-अनूपपुर रेलखंड में आने वाले हर्री-वेंकटनगर-निगौरा सेक्शन में 5 नवंबर को ऑटोमैटिक सिग्नलिंग शुरू की गई। तीन रेल लाइनों वाले इस खंड की लंबाई 18 रूट किलोमीटर है। इसे 36 किलोमीटर दोहरी लाइन के बराबर माना गया है।

यह काम रेलवे के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) के मानक डिजाइन के अनुसार किया गया है। इसमें ऑटोमैटिक सिग्नलिंग को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से सीधे जोड़ा गया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की परियोजना इकाई, बिलासपुर ने यह काम पूरा किया है।

ऑटोमैटिक सिग्नलिंग से ये होंगे फायदे

एक ही रूट पर ज्यादा ट्रेनें: रेलमार्ग की क्षमता बढ़ेगी और एक के बाद एक कई ट्रेनें चलाई जा सकेंगी।

कम होगा इंतजार: स्टेशनों के बाहर और बीच रास्ते में ट्रेनों के अनावश्यक ठहराव कम होंगे।

समय की बचत: ट्रेनों की आवाजाही बेहतर होने से यात्रियों का सफर सुगम होगा और समय की बचत होगी।

नई ट्रेनों की गुंजाइश: बढ़ी हुई रेल क्षमता से भविष्य में नई ट्रेनें और अतिरिक्त फेरे चलाने का रास्ता खुलेगा।

मालगाड़ियों को मिलेगी रफ्तार: कोयला, इस्पात, सीमेंट और बिजली उद्योगों से जुड़ी मालगाड़ियों का परिचालन तेज होगा।

ऊर्जा की बचत: ट्रेनों के बार-बार रुकने और चलने में कमी आएगी, जिससे ऊर्जा की खपत भी घटेगी।

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