बिलासपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय (PHQ), रायपुर में पदस्थ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) अनामिका जैन को बिलासपुर हाईकोर्ट से राहत मिली है। न्यायालय ने उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। यह आदेश 15 अक्टूबर 2026 को रिट याचिका क्रमांक W.P.(S) No. 7565/2026 में पारित किया गया।
मामले में याचिकाकर्ता की प्रमुख दलील यह थी कि उनके खिलाफ लंबित आपराधिक प्रकरण और विभागीय जांच में आरोप तथा गवाह समान हैं। इन परिस्थितियों को लेकर उन्होंने विभागीय जांच की कार्यवाही को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
दुर्ग में पदस्थापना के दौरान दर्ज हुआ था मामला
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 में दुर्ग जिले में पदस्थापना के दौरान भिलाई निवासी के. व्ही. अरुण की शिकायत पर अनामिका जैन के खिलाफ पुरानी भिलाई थाने में आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस द्वारा मामले में चालान पेश किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग ने उनके खिलाफ आरोप पत्र जारी किया और विभागीय जांच शुरू कराई। इसी विभागीय कार्यवाही को चुनौती देते हुए अनामिका जैन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
आपराधिक केस और विभागीय जांच में समान आरोपों का मुद्दा
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आपराधिक मामले में जिन आरोपों की सुनवाई हो रही है, उन्हीं से जुड़े आरोपों और समान गवाहों के आधार पर विभागीय जांच भी संचालित की जा रही है।
याचिकाकर्ता के पक्ष ने तर्क दिया कि ऐसी स्थिति में दोनों कार्यवाहियों को एक साथ आगे बढ़ाने से बचने की जरूरत हो सकती है, खासकर तब जब आपराधिक मामले में आरोपों और साक्ष्यों की विस्तृत जांच महत्वपूर्ण हो।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ पूर्व निर्णयों का उल्लेख किया। इनमें कैप्टन एम. पॉल एन्थनी बनाम भारत गोल्ड माइन्स लिमिटेड, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एवं अन्य बनाम नीलम नाग एवं अन्य और अविनाश सदाशिव भोसले बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य जैसे मामले शामिल बताए गए।
इन फैसलों के आधार पर यह दलील दी गई कि यदि आपराधिक मुकदमे और विभागीय जांच में आरोप तथा गवाह काफी हद तक समान हों, तो मामले की परिस्थितियों को देखते हुए विभागीय जांच को उचित अवधि तक स्थगित रखने पर विचार किया जा सकता है।
हाईकोर्ट के आदेश से विभागीय कार्यवाही पर विराम
मामले में प्रस्तुत दलीलों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद बिलासपुर हाईकोर्ट ने अनामिका जैन के खिलाफ चल रही विभागीय जांच पर स्थगन आदेश जारी किया।
इस आदेश से फिलहाल विभागीय जांच की कार्यवाही पर रोक लगी है। हालांकि, इसे आपराधिक मामले में आरोपों के अंतिम निर्धारण या दोषमुक्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मामले का आगे का परिणाम न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित आदेशों पर निर्भर करेगा।