वॉशिंगटन/नई दिल्ली। रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर भारी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की आशंका के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े नए कानून के कई प्रावधानों के क्रियान्वयन से फिलहाल छूट दे दी है। 16 अक्टूबर 2026 को जारी कार्यकारी आदेश में उन्होंने इस फैसले के पीछे अमेरिका के राष्ट्रीय हित को आधार बताया।
इस कानून के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े आयातक देशों के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान था। भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता का विषय था, क्योंकि इससे भारतीय उत्पादों की अमेरिकी बाजार में कीमत बढ़ सकती थी और निर्यातकों पर दबाव पड़ सकता था। ताजा आदेश के बाद इस कानून के कुछ प्रमुख शुल्क और प्रतिबंध फिलहाल लागू नहीं किए जाएंगे। हालांकि, इसे रूस से जुड़े सभी अमेरिकी प्रतिबंधों की समाप्ति नहीं माना जाना चाहिए।
क्या है ट्रंप का नया फैसला?
व्हाइट हाउस की ओर से जारी कार्यकारी आदेश का नाम ‘Implementing the Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ है। इस कानून पर ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाना और यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी वित्तीय क्षमता को सीमित करना था।
कानून में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान शामिल था। नए आदेश में ट्रंप ने कानून के कुछ शुल्कों, प्रतिबंधों और पाबंदियों से छूट दी है। उन्होंने इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए कांग्रेस को आवश्यक प्रमाणन भी सौंपा।
हालांकि, आदेश में निगरानी और आगे की कार्रवाई की गुंजाइश बनी हुई है। अमेरिकी प्रशासन रूस से तेल और गैस की खरीद तथा प्रतिबंधों से बचने में दूसरे देशों की संभावित भूमिका पर नजर रखेगा। परिस्थितियों के आधार पर भविष्य में फैसले में बदलाव किया जा सकता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह राहत?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। रूस से मिलने वाला कच्चा तेल भारतीय ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐसे में रूस से तेल खरीदने के कारण भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने की आशंका व्यापार और आर्थिक संबंधों के लिहाज से अहम थी।
अतिरिक्त 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होने की स्थिति में अमेरिका को भेजे जाने वाले भारतीय सामान की लागत बढ़ सकती थी। इसका असर भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा, ऑर्डर और निर्यात कारोबार पर पड़ने की आशंका थी।
ट्रंप के ताजा आदेश से इस कानून के तहत प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्कों का खतरा फिलहाल कम हुआ है। इससे भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक बातचीत के लिए भी गुंजाइश बनी रह सकती है। हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत को भविष्य में रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर किसी भी तरह के अमेरिकी दबाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सितंबर में कानून बना, अक्टूबर में लागू होने से पहले मिली छूट
ट्रंप ने 18 सितंबर को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर किए थे। कानून में रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने तथा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई के प्रावधान शामिल थे।
नए कानून के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले दुनिया के पांच सबसे बड़े आयातक देशों पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान था। यह प्रावधान 18 अक्टूबर से या उसके बाद रूस से कच्चे तेल अथवा प्राकृतिक गैस की नई खरीद करने की स्थिति से जुड़ा था। लेकिन 16 अक्टूबर के कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने संबंधित शुल्कों से छूट दे दी।
रूस से डीजल खरीदने के समझौते की भी चर्चा
इस फैसले के साथ रूस से डीजल खरीदने को लेकर अमेरिका की गतिविधियां भी चर्चा में हैं। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल आपूर्ति से संबंधित समझौते की घोषणा की थी। ऐसे समय में रूस से ऊर्जा खरीद पर दूसरे देशों को दंडित करने वाले प्रावधानों से छूट देने के फैसले ने अमेरिकी नीति को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं।
क्या भारत पर भविष्य में भी नहीं लगेगा टैरिफ?
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि ट्रंप का आदेश राहत देता है, लेकिन भविष्य के लिए स्थायी गारंटी नहीं है। कार्यकारी आदेश में अमेरिकी प्रशासन को रूस से ऊर्जा खरीद की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई की सिफारिश करने की व्यवस्था भी दी गई है। इसलिए भारत पर भविष्य में किसी नए शुल्क या प्रतिबंध की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष: रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत को फिलहाल अमेरिकी टैरिफ के संभावित दबाव से राहत मिली है। इससे भारतीय निर्यातकों को तत्काल अनिश्चितता से कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन ऊर्जा सुरक्षा, भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े अगले फैसले इस मामले की दिशा तय करेंगे