अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर बैंक में जमा फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD मददगार साबित हो सकती है। लेकिन सवाल यह होता है कि FD समय से पहले तोड़ी जाए या उसके बदले लोन लिया जाए। दोनों विकल्पों की लागत अलग होती है और सही फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि पैसे कितने समय के लिए चाहिए और लोन कितनी जल्दी चुकाया जा सकता है।
FD समय से पहले तोड़ने पर क्या नुकसान होता है?
FD तोड़ने पर अब तक मिला पूरा ब्याज हमेशा खत्म नहीं होता। बैंक आमतौर पर यह देखता है कि रकम कितने समय तक जमा रही। इसके बाद उस अवधि के लिए लागू ब्याज दर के आधार पर ब्याज की दोबारा गणना की जा सकती है।
इसके अलावा, बैंक की नीति के अनुसार प्रीमैच्योर क्लोजर पेनल्टी भी लग सकती है। FD टूटने के बाद मैच्योरिटी तक मिलने वाला भविष्य का ब्याज भी बंद हो जाता है।
RBI के नियमों के तहत बैंकों को समय से पहले FD निकालने के लिए बोर्ड से मंजूर नीति रखनी होती है और ग्राहक को लागू पेनल्टी की जानकारी देनी होती है।
FD पर लोन कैसे मिलता है?
FD पर लोन लेने में जमा राशि को समय से पहले तोड़ा नहीं जाता। बैंक FD को सिक्योरिटी के रूप में रखते हुए उसके आधार पर लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा देता है।
इस दौरान FD पर ब्याज मिलता रहता है। हालांकि, लोन पर लगने वाली ब्याज दर आमतौर पर FD की ब्याज दर से कुछ अधिक होती है। कई मामलों में यह अंतर करीब 1 से 2 प्रतिशत अंक तक हो सकता है, लेकिन वास्तविक दर बैंक और लोन प्रोडक्ट पर निर्भर करती है।
कुछ बैंक ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी देते हैं। इसमें पूरी स्वीकृत राशि निकालना जरूरी नहीं होता। आमतौर पर जितनी रकम इस्तेमाल की जाती है, ब्याज भी उसी पर लगता है।
तीन महीने के लिए पैसे चाहिए तो क्या करें?
मान लीजिए आपको 2 लाख रुपये सिर्फ तीन महीने के लिए चाहिए और आपके पास पर्याप्त रकम की FD है।
- FD तोड़ने पर ब्याज में कटौती हो सकती है।
- प्रीमैच्योर क्लोजर पेनल्टी भी लग सकती है।
- FD पर लोन लेकर तीन महीने में चुका देने पर कुल लागत कम हो सकती है।
- इस दौरान आपकी FD भी जारी रहती है।
अगर लोन चुकाने का स्पष्ट प्लान है, तो कम अवधि के लिए FD पर लोन एक उपयोगी विकल्प हो सकता है।
दो साल तक पैसा चाहिए तो तस्वीर बदल सकती है
अगर वही 2 लाख रुपये दो साल के लिए चाहिए और यह तय नहीं है कि लोन कब चुकाया जाएगा, तो लंबे समय तक ब्याज देना महंगा पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में सिर्फ FD को बचाए रखने के लिए लगातार लोन चलाना हमेशा फायदेमंद नहीं होगा। FD तोड़ने से होने वाले नुकसान और दो साल के लोन पर लगने वाले ब्याज की तुलना करना जरूरी है।
FD की मैच्योरिटी कब है?
फैसला लेते समय FD की मैच्योरिटी डेट भी जरूर देखें।
- अगर मैच्योरिटी में कुछ ही दिन या महीने बचे हैं, तो समय से पहले तोड़ने का नुकसान सीमित हो सकता है।
- अगर FD पर विशेष या ज्यादा ब्याज दर मिल रही है, तो उसे तोड़ने से पहले लोन की पूरी लागत निकालें।
- अगर FD लंबे समय के लिए है, तो ब्याज के अंतर और पेनल्टी को ध्यान से समझें।
बैंक से ये दो आंकड़े जरूर पूछें
फैसला अनुमान के आधार पर न लें। बैंक से लिखित या स्पष्ट जानकारी मांगें—
- आज FD तोड़ने पर हाथ में कितनी रकम मिलेगी?
- FD पर लोन लेने और उसे चुकाने में कुल कितना खर्च आएगा?
लोन की ब्याज दर के अलावा प्रोसेसिंग फीस, ओवरड्राफ्ट चार्ज, भुगतान की शर्तें और अन्य शुल्क भी देखें।
यह भी ध्यान रखें कि लोन नहीं चुकाने की स्थिति में बैंक FD की रकम से अपना बकाया वसूल सकता है।
सीधा नियम
अगर पैसे कुछ महीनों के लिए चाहिए और लोन चुकाने की योजना साफ है, तो FD पर लोन लेना उपयोगी हो सकता है।
लेकिन अगर पैसे लंबे समय के लिए चाहिए और भुगतान की तारीख तय नहीं है, तो FD तोड़ने और लंबे लोन की कुल लागत की तुलना करना ज्यादा जरूरी है।