छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिली है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रथम दृष्टया उनकी भूमिका सामने आती है। अदालत के मुताबिक, गंभीर चिकित्सकीय स्थिति या हिरासत के दौरान आवश्यक इलाज नहीं मिलने के पर्याप्त प्रमाण के अभाव में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत विशेष राहत नहीं दी जा सकती।
सोनवानी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जुलाई 2026 में गिरफ्तार किया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले रायपुर की विशेष PMLA अदालत ने 20 अगस्त 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
मेडिकल आधार पर जमानत की मांग खारिज
सोनवानी की ओर से अदालत में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का हवाला दिया गया। उनके वकील ने दलील दी कि हृदय संबंधी समस्या के चलते 20 अगस्त 2026 को उन्हें अस्थायी पेसमेकर लगाया गया था और स्थायी पेसमेकर लगाने की सलाह भी दी गई थी। उनकी उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जमानत देने की मांग की गई।
वहीं, ED ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सोनवानी का इलाज रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल या अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में कराया जा सकता है। सह-आरोपियों को जमानत मिलने का तर्क भी अदालत को राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं लगा।
33 से अधिक अभ्यर्थियों से करीब 3 करोड़ रुपये लेने का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक, CGPSC की 2020-21 की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के दौरान 33 से अधिक अभ्यर्थियों से लगभग 3 करोड़ रुपये जुटाए गए। जांच एजेंसी ने करीब 3.45 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित राशि का उल्लेख किया है।
ED का आरोप है कि प्रश्नपत्र लीक कराने और पसंदीदा अभ्यर्थियों के चयन में मदद करने के बदले रकम ली गई। एजेंसी के अनुसार, कथित लेन-देन में अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। ये आरोप जांच एजेंसी के हैं और इन पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना है।
2021 की परीक्षा में 1.29 लाख से अधिक अभ्यर्थी हुए थे शामिल
CGPSC की वर्ष 2021 की प्रारंभिक परीक्षा में 1,29,206 अभ्यर्थियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इनमें से 2,548 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा तक पहुंचे, जबकि 509 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। अंतिम चयन सूची में 170 उम्मीदवार शामिल हुए थे।
इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जनवरी 2026 में दाखिल आरोपपत्र में 29 लोगों को आरोपी बनाया था। मामले में भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और कथित वित्तीय लेन-देन को लेकर जांच जारी है।
परिवार की परिभाषा में बदलाव और 45 लाख रुपये के लेन-देन का आरोप
ED ने आरोप लगाया है कि 14 जुलाई 2021 को भर्ती नियमों में संशोधन कर परिवार की परिभाषा से ‘भतीजा’ शब्द हटाया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इस बदलाव से सोनवानी के भतीजों नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी के क्रमशः डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी पद पर चयन का रास्ता आसान हुआ। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली सुनवाई और साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक श्रवण कुमार गोयल के माध्यम से ग्रामीण विकास समिति को कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत 45 लाख रुपये दिए गए। ED का दावा है कि इस राशि का संबंध कथित प्रश्नपत्र लीक से था।
अब सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं सोनवानी
मामले में CBI आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, जबकि ED की अभियोजन शिकायत विशेष PMLA अदालत में लंबित बताई गई है। वित्तीय लेन-देन और अन्य लोगों की कथित भूमिका की जांच भी जारी है।
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद सोनवानी कानून के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल कर सकते हैं। इसके अलावा, परिस्थितियों में बदलाव होने पर वह नियमानुसार दोबारा जमानत की मांग भी कर सकते हैं।
महत्वपूर्ण: इस मामले में बताए गए वित्तीय लेन-देन, भर्ती में कथित अनियमितताओं और नियमों में बदलाव से जुड़े आरोप जांच एजेंसियों के दावे हैं। आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।