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निवेशकों की पहली पसंद बन रहा छत्तीसगढ़ : 18 महीनों में मिले ₹8 लाख करोड़ से अधिक के प्रस्ताव, जमीन पर उतरने लगीं परियोजनाएं

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को नई गति मिल रही है, राज्य में 1 नवंबर 2024 से लागू औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के बाद निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ा है। पिछले लगभग 18 महीनों में प्रदेश को करीब ₹8 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें शामिल अनेक परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। सरकार का फोकस अब केवल निवेश प्रस्ताव और एमओयू तक सीमित न रहकर उन्हें धरातल पर उतारने पर है।

₹8 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग सामने आए हैं। सरकार के अनुसार, करीब ₹8 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सरकार द्वारा निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के लिए संबंधित विभागों और निवेशकों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। कई प्रस्तावों में परियोजना स्थापना और क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।

पारंपरिक उद्योगों के साथ नए सेक्टरों पर फोकस
छत्तीसगढ़ लंबे समय से कोयला, लोहा और इस्पात उद्योगों के लिए जाना जाता है। अब राज्य में निवेश का दायरा पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़कर आधुनिक और तकनीक आधारित क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। निवेश प्रस्तावों में सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, ग्रीन स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इससे राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था में विविधता आने की उम्मीद है।

Ease of Doing Business पर सरकार का जोर
निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने के उद्देश्य से राज्य में वन-क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 शुरू किया गया है। इसके माध्यम से विभिन्न अनुमतियों और स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का प्रयास किया गया है। प्रशासनिक सुधारों के तहत पिछले दो वर्षों में 450 से अधिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण किए जाने की जानकारी दी गई है। इसका उद्देश्य निवेशकों को अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं और देरी से राहत देना है।

रोजगार के नए अवसरों पर जोर
निवेश परियोजनाओं के क्रियान्वयन से प्रदेश में लगभग 1.72 लाख से 1.9 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। नई औद्योगिक नीति के तहत स्थानीय युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। प्रशिक्षण के लिए प्रति कर्मचारी ₹15 हजार तक का प्रशिक्षण भत्ता देने का प्रावधान भी किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए आवश्यक कौशल उपलब्ध कराना है।

2030 तक 45 मिलियन टन स्टील उत्पादन का लक्ष्य
राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक छत्तीसगढ़ में स्टील उत्पादन को बढ़ाकर 45 मिलियन टन करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही स्टील आधारित डाउनस्ट्रीम और वैल्यू-एडेड उद्योगों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे प्रदेश में औद्योगिक निवेश के साथ सहायक उद्योगों, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कारोबार के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी।

बस्तर में निवेश और रोजगार पर फोकस
औद्योगिक विकास को राज्य के सभी क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए बस्तर संभाग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यहां पर्यटन, वनोपज, हस्तशिल्प और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है। बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट जैसे आयोजनों के जरिए निवेशकों को क्षेत्र की संभावनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रस्तावित निवेश में बस्तर क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बताई गई है, जिससे स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

2030 तक 5 हजार स्टार्टअप का लक्ष्य
राज्य में स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2030 तक 5,000 स्टार्टअप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड लीडर्स फोरम में सम्मिलित हुए और वैश्विक मंच से छत्तीसगढ़ के भविष्य के विकास का रोडमैप प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अब पारंपरिक संसाधन-आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर AI, स्टार्टअप, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक विनिर्माण पर आधारित नई अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2030 तक 5 हजार स्टार्टअप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, बस्तर में शांति के साथ विकास, पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं।

निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की तैयारी
छत्तीसगढ़ में मिले करीब ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव राज्य के औद्योगिक विस्तार की बड़ी संभावनाएं दिखाते हैं। सरकार का जोर अब इन प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया को गति देने पर है। औद्योगिक नीति, सिंगल विंडो व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण और नए क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने से आने वाले वर्षों में प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।

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