विश्व फुटबॉल के महानतम खिलाड़ियों में शुमार पुर्तगाल के दिग्गज फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। 41 वर्षीय रोनाल्डो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक भावुक वीडियो साझा कर अपने 23 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर को अलविदा कहने का फैसला सुनाया। इस घोषणा के बाद अब रोनाल्डो पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम की जर्सी में खेलते नजर नहीं आएंगे।
कजाकिस्तान के खिलाफ किया था डेब्यू, दो दशक तक कायम रहा दबदबा
क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने साल 2003 में कजाकिस्तान के खिलाफ पुर्तगाल की ओर से अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला था। इसके बाद उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व फुटबॉल में अपनी अलग पहचान बनाई।
अपने लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में रोनाल्डो ने पुर्तगाल की ओर से पांच फीफा विश्व कप और रिकॉर्ड छह यूरोपियन चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। उन्होंने अपनी कप्तानी और प्रदर्शन से पुर्तगाल को कई यादगार उपलब्धियां दिलाईं।
बताया जा रहा है कि फीफा विश्व कप 2026 में वेल्स के खिलाफ खेला गया मुकाबला उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मैच रहा। टूर्नामेंट से पहले ही रोनाल्डो संकेत दे चुके थे कि यह उनका आखिरी बड़ा वैश्विक टूर्नामेंट हो सकता है। हालांकि, अपने शानदार करियर के बावजूद वह पुर्तगाल को विश्व कप का खिताब नहीं दिला सके।
विवादों के बीच लिया संन्यास का फैसला
संन्यास की घोषणा से पहले रोनाल्डो कुछ विवादों को लेकर भी सुर्खियों में थे। हाल ही में नेशनल कैंप छोड़ने के आरोपों के बाद पुर्तगाल फुटबॉल महासंघ की ओर से उन पर 30 दिनों का प्रतिबंध लगाए जाने की खबर सामने आई थी। इन घटनाक्रमों के बीच उनके संन्यास के फैसले ने फुटबॉल जगत में हलचल पैदा कर दी है।
भावुक संदेश में बोले- पूरी संतुष्टि के साथ विदा ले रहा हूं
अपने संन्यास का ऐलान करते हुए रोनाल्डो ने भावुक संदेश में कहा,
“मैं एकदम शांत और संतुष्ट मन के साथ विदा ले रहा हूं। मुझे इस बात का पूरा संतोष है कि मैंने अपनी राष्ट्रीय टीम की इस जर्सी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है।”
रोनाल्डो ने अपने संदेश में अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान मिली उपलब्धियों और यादगार पलों को भी याद किया। उनके 23 साल के इस सफर ने न केवल पुर्तगाल फुटबॉल को नई पहचान दिलाई, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों फुटबॉल प्रशंसकों को भी यादगार लम्हे दिए।
उनके संन्यास के साथ ही अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल के एक बड़े अध्याय का अंत हो गया है।