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Direct vs Regular Mutual Fund: एक ही फंड, फिर रिटर्न में क्यों होता है अंतर? जानिए आपके लिए कौन-सा प्लान बेहतर

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म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय अक्सर एक ही स्कीम के सामने Direct Plan और Regular Plan के विकल्प दिखाई देते हैं। नाम और फंड की रणनीति लगभग समान होने के बावजूद दोनों में मिलने वाला रिटर्न अलग हो सकता है।

इसका सबसे बड़ा कारण है एक्सपेंस रेशियो यानी निवेश को मैनेज करने की लागत। ऐसे में निवेशक के लिए यह समझना जरूरी है कि Direct और Regular Plan में वास्तविक अंतर क्या है और किस तरह का प्लान उसके लिए उपयुक्त हो सकता है।

Direct और Regular Plan में क्या अंतर है?

Direct Plan में निवेशक म्यूचुअल फंड कंपनी या Direct Plan उपलब्ध कराने वाले प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे निवेश करता है। इसमें म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर की भूमिका नहीं होती।

वहीं Regular Plan में निवेशक डिस्ट्रीब्यूटर, एजेंट या सलाहकार के माध्यम से फंड में निवेश करता है। दोनों प्लान में आमतौर पर फंड मैनेजर और अंतर्निहित पोर्टफोलियो एक ही होता है।

यानी अंतर मुख्य रूप से इस बात का है कि निवेशक फंड तक सीधे पहुंच रहा है या किसी मध्यस्थ की मदद ले रहा है।

Direct Plan का खर्च कम क्यों होता है?

Direct Plan की सबसे बड़ी खासियत इसका अपेक्षाकृत कम एक्सपेंस रेशियो है। इसमें डिस्ट्रीब्यूटर से जुड़ा कमीशन शामिल नहीं होता, इसलिए निवेश की लागत आमतौर पर Regular Plan से कम रहती है।

Regular Plan में डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े खर्च शामिल होते हैं। इसी वजह से दोनों प्लान की NAV अलग-अलग हो सकती है।

लंबे समय तक निवेश करने पर खर्च में छोटा-सा अंतर भी महत्वपूर्ण बन सकता है। इसकी वजह है कंपाउंडिंग—समय के साथ लागत का असर निवेश के अंतिम मूल्य पर बढ़ सकता है।

हालांकि Direct और Regular के बीच TER का अंतर हर स्कीम में समान नहीं होता। इसलिए निवेश से पहले संबंधित फंड का Total Expense Ratio (TER) जरूर देखना चाहिए।

क्या Regular Plan लेना नुकसान का सौदा है?

ऐसा कहना सही नहीं होगा।

Regular Plan में निवेशक को डिस्ट्रीब्यूटर या सलाहकार के जरिए फंड चुनने, निवेश करने और कई बार पोर्टफोलियो से जुड़ी जानकारी समझने में मदद मिल सकती है।

खासकर ऐसे निवेशकों के लिए यह विकल्प उपयोगी हो सकता है जो पहली बार म्यूचुअल फंड में पैसा लगा रहे हैं या खुद अलग-अलग स्कीम, जोखिम और पोर्टफोलियो को समझने में सहज नहीं हैं।

इस सुविधा की कीमत निवेशक को आमतौर पर ज्यादा खर्च के रूप में चुकानी पड़ती है।

Direct Plan किन निवेशकों के लिए बेहतर हो सकता है?

अगर आप:

  • खुद म्यूचुअल फंड की रिसर्च कर सकते हैं,
  • अलग-अलग स्कीम और उनके जोखिम की तुलना समझते हैं,
  • अपने निवेश की नियमित निगरानी कर सकते हैं,
  • और निवेश से जुड़े फैसले खुद लेने में सहज हैं,

तो Direct Plan आपके लिए कम लागत वाला विकल्प हो सकता है।

लेकिन सिर्फ यह देखकर Direct Plan चुनना सही नहीं है कि उसकी NAV या रिटर्न ज्यादा दिखाई दे रहा है। इसमें फंड चुनने से लेकर निवेश और पोर्टफोलियो की निगरानी तक की जिम्मेदारी निवेशक की खुद की होती है।

Direct या Regular—किसे चुनें?

आधारDirect PlanRegular Plan
डिस्ट्रीब्यूटरनहींहोता है
एक्सपेंस रेशियोआमतौर पर कमआमतौर पर ज्यादा
निवेश संबंधी मददसीमित/स्वयंडिस्ट्रीब्यूटर से मिल सकती है
रिसर्च की जिम्मेदारीनिवेशक कीडिस्ट्रीब्यूटर मदद कर सकता है
किसके लिएअनुभवी/स्वयं निर्णय लेने वालेमार्गदर्शन चाहने वाले

फैसला सिर्फ रिटर्न देखकर न करें

Direct Plan का खर्च कम होना इसका बड़ा फायदा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर निवेशक के लिए वही सबसे अच्छा विकल्प है।

अगर आपको अपने निवेश के फैसले खुद लेने का ज्ञान और समय है, तो Direct Plan पर विचार किया जा सकता है। वहीं, यदि आपको फंड चुनने और निवेश से जुड़े फैसलों में लगातार सहायता चाहिए, तो Regular Plan आपके लिए अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

आखिरकार सही विकल्प वह है, जिसे आप अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता, ज्ञान और निवेश अवधि को ध्यान में रखकर लंबे समय तक अनुशासन के साथ बनाए रख सकें।

नोट: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिम के अधीन हैं। निवेश का फैसला लेने से पहले संबंधित स्कीम के दस्तावेज, खर्च और जोखिम को समझना उचित है।

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