: धनतेरस के साथ दीपोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। आज, 7 नवंबर को छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी मनाई जा रही है, जबकि रोशनी और खुशियों का महापर्व दीपावली कल, 8 नवंबर 2026 (रविवार) को मनाया जाएगा।
दिवाली हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन घरों को दीपों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है। शाम को प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
मान्यता है कि दिवाली पर विधि-विधान से लक्ष्मी पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि, धन और खुशहाली आती है। आइए जानते हैं दिवाली 2026 की सही तारीख, लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त, अमावस्या तिथि, पूजा का महत्व और इससे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं।
दिवाली पूजा की संपूर्ण विधि: 10 आसान स्टेप्स में करें मां लक्ष्मी और गणेश जी का पूजन
दिवाली की शाम मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान और श्रद्धा से पूजा करने पर घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। आइए जानते हैं दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन की संपूर्ण विधि।
1. घर की साफ-सफाई और सजावट करें
दिवाली की पूजा से पहले पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करें। मुख्य द्वार और पूजा स्थल को फूलों, रंगोली और तोरण से सजाएं। शाम के समय घर में दीपक और रोशनी करें।
2. पूजा स्थल तैयार करें
पूजा के लिए घर के उत्तर या पूर्व दिशा में एक साफ चौकी रखें। इस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। चौकी पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित करें।
3. कलश स्थापना करें
चौकी के पास जल से भरा कलश रखें। इसमें सुपारी और सिक्का डालें तथा कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाएं। इसके ऊपर नारियल रखकर स्वस्तिक बनाएं। कलश को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
4. सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। सबसे पहले गणेश जी का आवाहन करें। उन्हें फूल, अक्षत, दूर्वा, धूप और दीप अर्पित करें तथा सुख-शांति की कामना करें।
5. मां लक्ष्मी का आवाहन और पूजन करें
अब मां लक्ष्मी का ध्यान और आवाहन करें। उन्हें लाल फूल, कमल, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर मां लक्ष्मी की स्तुति करें। परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु षोडशोपचार यानी 16 प्रकार के पूजन उपचारों से भी मां की पूजा करते हैं।
6. भगवान कुबेर का पूजन करें
मां लक्ष्मी के साथ धन के देवता भगवान कुबेर की भी पूजा करें। उनके सामने दीपक जलाएं और फूल, अक्षत आदि अर्पित करें। परिवार की आर्थिक खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना करें।
7. मिठाई और फल का भोग लगाएं
पूजा के दौरान मां लक्ष्मी और गणेश जी को फल, मिठाई, खीर, पंचमेवा और अन्य पकवानों का भोग लगाएं। ध्यान रखें कि भोग श्रद्धा और शुद्धता के साथ तैयार किया गया हो।
8. घर में दीपक जलाएं
पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार, आंगन, बालकनी और अन्य प्रमुख स्थानों पर दीपक जलाएं। मान्यता है कि दीपों की रोशनी से घर में सकारात्मकता और खुशहाली आती है।
9. मां लक्ष्मी और गणेश जी की आरती करें
पूजा के अंत में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें। परिवार के सभी सदस्य एक साथ आरती में शामिल हों और श्रद्धापूर्वक भजन-कीर्तन करें।
10. प्रसाद बांटें और आशीर्वाद लें
आरती पूरी होने के बाद सभी को प्रसाद वितरित करें। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश से परिवार की सुख-शांति, अच्छी सेहत, सफलता और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
विशेष बात: पूजा की विधि और परंपराएं अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं। अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा करना शुभ माना जाता है।
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का महत्व
दीपावली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी धन, सुख-समृद्धि और वैभव की देवी हैं, जबकि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का देवता माना जाता है। मान्यता है कि दिवाली की रात विधि-विधान से उनकी पूजा करने से घर में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहती है।
इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं और उन्हें दीयों, फूलों, रंगोली और रोशनी से सजाते हैं। शाम को परिवार के सभी सदस्य नए या पारंपरिक कपड़े पहनकर पूजा में शामिल होते हैं। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश को मिठाई और पकवानों का भोग लगाया जाता है। कई घरों में माता सरस्वती और भगवान कुबेर की भी पूजा की जाती है।
दिवाली क्यों मनाई जाती है? जानें पौराणिक कथा
दीपावली मनाने के पीछे कई धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं। सबसे प्रमुख मान्यता भगवान राम के अयोध्या लौटने से जुड़ी है। वहीं, एक अन्य कथा के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। यही वजह है कि दिवाली को प्रकाश, खुशहाली और समृद्धि का त्योहार माना जाता है।
भगवान राम के अयोध्या लौटने की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने रावण का वध करने के बाद माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों का वनवास पूरा किया और अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से रोशन किया था। तभी से हर साल कार्तिक अमावस्या को दीप जलाकर दीपावली मनाने की परंपरा चली आ रही है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक माना जाता है।
समुद्र मंथन से जुड़ी माता लक्ष्मी की कथा
एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच हुए समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक अमावस्या के दिन मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसके बाद भगवान विष्णु ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। मान्यता है कि दीपावली की रात मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन, वैभव और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इसी वजह से इस दिन लक्ष्मी पूजन को विशेष महत्व दिया जाता है।
देशभर में अलग-अलग तरीके से मनाई जाती है दिवाली
भारत में दीपावली का त्योहार अलग-अलग राज्यों में अपनी परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार मनाया जाता है। उत्तर भारत में लोग भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में घरों और मंदिरों को दीयों से सजाते हैं। पंजाब में यह पर्व सिख समुदाय के लिए बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी खास महत्व रखता है। इस दिन गुरु हरगोबिंद साहिब जी की रिहाई की याद में उत्सव मनाया जाता है।
वहीं, पश्चिम बंगाल में दिवाली की रात मां काली की पूजा की जाती है, जिसे काली पूजा कहते हैं। दक्षिण और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में भी दीपावली को अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया जाता है। जैन धर्म के अनुयायी इस दिन भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में दीपावली मनाते हैं। नेपाल में इसे तिहार के नाम से जाना जाता है, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में स्वांती पर्व के रूप में भी उत्सव मनाया जाता है।
दिवाली पर किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है?
दीपावली पर मुख्य रूप से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। मां लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश की पूजा सुख-शांति और सभी कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए की जाती है।
इनके अलावा कई परिवारों में विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती तथा धन के देवता भगवान कुबेर की भी पूजा की जाती है। पूजा के दौरान सभी देवी-देवताओं को फूल, फल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर परिवार में सुख, शांति, ज्ञान और समृद्धि बनी रहती है।