सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के दल्लीराजहरा लौह अयस्क खदान द्वारा खदान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस), बिलासपुर क्षेत्र-1 एवं 2 तथा रायगढ़ क्षेत्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 42वें वार्षिक खदान सुरक्षा पखवाड़ा समारोह 2026 (नॉन कोल माईंस) के अंतर्गत प्रथम जनरल बॉडी मीटिंग का आयोजन 23 अक्टूबर 2026 को भिलाई निवास के बहुउद्देशीय सभागार में किया गया।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसकी अध्यक्षता खदान सुरक्षा निदेशक, क्षेत्र-1 के अध्यक्ष श्री इरफान अंसारी, खदान सुरक्षा निदेशक एवं सह-अध्यक्ष, बिलासपुर क्षेत्र-2 श्री अल्ताफ हुसैन, उप निदेशक खदान सुरक्षा एवं सह-अध्यक्ष, रायगढ़ क्षेत्र श्री सनथ कुमार पी., सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्यपालक निदेशक (खदान) श्री कमल भास्कर, कार्यपालक निदेशक (रावघाट) श्री अरुण कुमार; उपाध्यक्ष एवं सीजीएम (खदान), सीजीओएम, सीएमएलओ (सेल) श्री ए.के. सिंह, सचिव एवं जीएम (टीएस एंड ई), आईओसी-दल्ली राजहरा श्री बीरेंद्र कुमार, संयोजक, डीडीएमएस, बिलासपुर क्षेत्र-1 श्री शिव कुमार पी. तेम्बाड; सीजीएम (फ्लक्स) श्री चिंतला श्रीकांत, सीजीएम (रावघाट) श्री अनुपम बिष्ट ने की। कार्यक्रम में खदान सुरक्षा महानिदेशालय, सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र तथा दल्ली राजहरा एवं रावघाट खदानों के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिभागी खदानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस बैठक का उद्देश्य खदानों में सुरक्षा मानकों के अनुपालन, सुरक्षित कार्यप्रणाली को बढ़ावा देने, संभावित जोखिमों की पहचान एवं दुर्घटनाओं की रोकथाम, सुरक्षा संबंधी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा खदान कर्मियों के प्रशिक्षण एवं सुरक्षा जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा करना था। साथ ही, खनन गतिविधियों के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने, मशीनों के सुरक्षित संचालन तथा कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण बनाए रखने में सभी संबंधित पक्षों की भूमिका पर विचार-विमर्श भी किया गया।
42वें वार्षिक खदान सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत आयोजित जनरल बॉडी मीटिंग को संबोधित करते हुए खदान सुरक्षा निदेशक एवं क्षेत्र-1 के अध्यक्ष श्री इरफान अंसारी ने कहा कि खदान सुरक्षा पर किया गया निवेश सुरक्षित खनन एवं उत्पादन कार्यों की दक्षता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सुरक्षा मानकों के प्रभावी अनुपालन, खदानों में नियमित निरीक्षण के माध्यम से सुरक्षित कार्यप्रणाली, निरीक्षण दल के गठन में निर्धारित मानकों का ध्यान रखने तथा डिजिटल माध्यमों से सूचनाओं के प्रभावी संप्रेषण और निरीक्षण प्रक्रिया में सभी संबंधित सदस्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया।
उन्होंने खदान सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों से प्राप्त निष्कर्षों और अनुभवों को संकलित कर आगामी आयोजनों में उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर बेहतर कार्ययोजना तैयार करने में सहायता मिलने के साथ ही जमीनी स्तर पर सुरक्षा संस्कृति को सुदृढ़ करने तथा निरीक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में भी सहायक होगी।
खदान सुरक्षा निदेशक एवं सह-अध्यक्ष श्री अल्ताफ हुसैन ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों की खदानों की व्यापक सहभागिता को महत्वपूर्ण बताते हुए आयोजन को उच्च स्तर पर आयोजित करने की अपेक्षा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निरीक्षण, तकनीकी प्रतियोगिताओं एवं अन्य गतिविधियों के माध्यम से खदानों में अपनाई जा रही श्रेष्ठ एवं नवाचारी कार्यप्रणालियों को साझा किया जाना चाहिए। उन्होंने स्मारिका में व्यावहारिक सुरक्षा उपायों, नवाचारों और उपयोगी लेखों को शामिल करने तथा सभी श्रेणियों की अधिकाधिक खदानों की भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस आयोजन से विभिन्न खदानों के बीच उपयोगी कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान होगा और डीजीएमएस के शून्य हानि एवं शून्य दुर्घटना के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी।
कार्यपालक निदेशक (खदान) श्री कमल भास्कर ने 42वें वार्षिक खान सुरक्षा सप्ताह-2026 के अंतर्गत आयोजित प्रथम बैठक में सभी प्रतिभागियों की सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिलासपुर क्षेत्र-1, बिलासपुर क्षेत्र-2 एवं रायगढ़ क्षेत्र की संयुक्त सहभागिता से आयोजित यह खान सुरक्षा सप्ताह व्यापक स्तर पर खान सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का आयोजन खदानों में सुरक्षित कार्यप्रणाली को प्रोत्साहित करने तथा सुरक्षा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को मजबूत करने में सहायक होगा।
कार्यपालक निदेशक (रावघाट) श्री अरुण कुमार ने अपने उद्बोधन में बताया कि सेल की रावघाट परियोजना को 14 मिलियन टन वार्षिक क्षमता वाली ग्रीनफील्ड खदान के रूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत 3 मिलियन टन की क्षमता के अनुरूप उत्पादन कार्य प्रारंभ हो चुका है तथा इसके विकास में तेजी से प्रगति हुई है। उन्होंने कैप्टिव खदानों से लौह अयस्क की आपूर्ति के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि संशोधन के बाद कैप्टिव खदानों से उत्पादित लौह अयस्क की खुले बाजार में बिक्री भी की जा सकती है। इससे लौह अयस्क की बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
कार्यक्रम के शुरुआत में सीजीओएम एवं सीएमएलओ (सेल) श्री ए.के. सिंह स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए खदान सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा तथा खनन कार्यों में सुरक्षा मानकों के प्रभावी अनुपालन की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसके पश्चात विभिन्न अधिकारियों ने सभा को संबोधित करते हुए खदानों में सुरक्षा व्यवस्था, सुरक्षित कार्यप्रणाली तथा सुरक्षा मानकों के अनुपालन से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए।
बैठक के दौरान दल्ली राजहरा के महाप्रबंधक (टीएसएंडई) एवं एएमएसएफसी-2026 के सचिव श्री बिरेन्द्र कुमार ने खदान सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत प्रस्तावित गतिविधियों एवं आयोजन संबंधी विषयों पर प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जानकारी दी।
कार्यक्रम का उद्देश्य खदानों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, सुरक्षित कार्यप्रणाली को प्रोत्साहित करना तथा खदान कर्मियों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाना था। कार्यक्रम का संचालन सुश्री रजनी रजक द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन महाप्रबंधक प्रभारी (दल्ली राजहरा) श्री विपिन कुमार ने प्रस्तुत किया।