नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच Google DeepMind के पूर्व वैज्ञानिक बिलाल चुगताई ने गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि आने वाले समय में AI पूरी मानव जाति के लिए बड़ा खतरा बन सकती है और इस संकट को रोकने के लिए दुनिया के पास बहुत कम समय बचा है।
बिलाल चुगताई ने Google DeepMind से इस्तीफा देने के बाद सोशल मीडिया पर AI के संभावित खतरों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि AI जिस दिशा में आगे बढ़ रही है, वह बेहद चिंताजनक है। उनके मुताबिक, अगर समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में इंसानों का AI पर नियंत्रण खत्म हो सकता है।
इससे पहले Anthropic के रिसर्चर जैकब कॉक्सन भी इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया था कि AI विकसित करने वाले कई डेवलपर्स खुद मानते हैं कि वर्ष 2030 तक यह तकनीक इंसानों के लिए जानलेवा खतरा बन सकती है।
AI से इंसानों को दो बड़े खतरे
1. AI पर नियंत्रण खोने का डर
फिलहाल AI सिस्टम इंसानों के दिए निर्देशों के आधार पर काम करते हैं। लेकिन भविष्य में ऐसी मशीनें विकसित होने की आशंका है, जो इंसानों से कहीं ज्यादा बुद्धिमान और सक्षम होंगी। इस स्तर की तकनीक को आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस यानी AGI कहा जाता है।
विशेषज्ञों को डर है कि यदि AI इंसानों से अधिक बुद्धिमान हो गई और उसने अपने फैसले खुद लेने शुरू कर दिए, तो वह मानव निर्देशों का पालन करने से इनकार कर सकती है। ऐसी स्थिति में इंसानों के लिए AI को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो सकता है।
2. स्वायत्त हथियारों का खतरा
AI आधारित स्वायत्त हथियार और ड्रोन बिना सीधे मानवीय नियंत्रण के काम कर सकते हैं। ऐसी प्रणालियां खुद यह तय करने में सक्षम हो सकती हैं कि किसे निशाना बनाना है या कब हमला करना है।
इस तरह की तकनीक के गलत इस्तेमाल से बड़े स्तर पर नुकसान, युद्ध और मानव जीवन के लिए गंभीर खतरे की आशंका जताई जा रही है।
बिलाल चुगताई बोले—खतरा टालने के लिए समय बहुत कम
बिलाल चुगताई Google DeepMind की उस टीम का हिस्सा रह चुके हैं, जिसका काम यह सुनिश्चित करना था कि AI मानव हित में काम करे और लोगों को नुकसान न पहुंचाए।
इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि Google में काम करते हुए उन्होंने AI को बेहद करीब से विकसित होते देखा है। उनके मुताबिक, AI की मौजूदा दिशा डर पैदा करने वाली है और यह तकनीक भविष्य में मानव जाति के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती है।
बिलाल का मानना है कि AI कंपनियां जल्द ही इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान सिस्टम तैयार कर सकती हैं। ऐसे में एक समय ऐसा भी आ सकता है, जब इंसानों का इन मशीनों पर नियंत्रण पूरी तरह खत्म हो जाए।
चार साल में AI की क्षमता में बड़ा बदलाव
बिलाल चुगताई ने AI की तेज रफ्तार का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2022 में जब उन्होंने इस क्षेत्र में काम शुरू किया था, तब AI सिस्टम काफी सीमित क्षमता वाले थे। लेकिन महज चार वर्षों में इस तकनीक ने तेजी से प्रगति की है।
हाल ही में OpenAI ने दावा किया था कि उसके AI सिस्टम ने गणित की करीब 90 साल पुरानी कठिन नेवियर-स्टोक्स समस्या को हल कर लिया है। वहीं, एक अन्य मामले में OpenAI के करीब 700 AI एजेंट्स ने बिना किसी सीधे मानवीय निर्देश के ‘हगिंग फेस’ नामक कंपनी के सिस्टम को हैक करने की कोशिश की।
इन घटनाओं ने AI की क्षमताओं के साथ-साथ उसके संभावित दुरुपयोग और सुरक्षा जोखिमों को लेकर भी बहस तेज कर दी है।
AI कंपनियों की होड़ पर रोक लगाने की मांग
बिलाल चुगताई का कहना है कि AI को सुरक्षित तरीके से विकसित करना अभी भी संभव है, लेकिन इसके लिए दुनिया की सभी बड़ी AI कंपनियों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने कंपनियों के बीच चल रही तेज प्रतिस्पर्धा को रोकने की मांग करते हुए कहा कि AI के विकास की रफ्तार उतनी ही होनी चाहिए, जितनी समाज और सरकारें सुरक्षित रूप से संभाल सकें। उनका मानना है कि किसी बड़े खतरे के सामने आने से पहले ही उसके समाधान पर काम करना जरूरी है।
Anthropic CEO भी दे चुके हैं रफ्तार धीमी करने की सलाह
AI कंपनी Anthropic के CEO डारियो अमोदेई भी AI विकास की रफ्तार को कुछ हद तक धीमा करने की सलाह दे चुके हैं। उन्होंने कहा है कि इससे AI से जुड़े जोखिमों को समझने और उनसे निपटने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
इस विचार का समर्थन OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन और एलन मस्क जैसे तकनीकी क्षेत्र के प्रमुख नामों की ओर से भी किया गया है।
ट्रम्प का तर्क—नियमों से चीन आगे निकल जाएगा
जहां वैज्ञानिक और कई AI कंपनियों के प्रमुख तकनीक पर नियंत्रण और सख्त नियमों की मांग कर रहे हैं, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का रुख अलग है।
ट्रम्प ने AI पर कड़े नियम लागू करने के विचार का विरोध किया है। उनका तर्क है कि यदि अमेरिकी कंपनियों पर ज्यादा पाबंदियां लगाई गईं, तो चीन AI की वैश्विक दौड़ में आगे निकल सकता है।
ट्रम्प के मुताबिक, AI की रेस में जो देश आगे रहेगा, वही भविष्य में दुनिया पर अपना प्रभाव कायम कर सकेगा।
नोट: AI के मानवता के लिए खतरे से जुड़े ये दावे विशेषज्ञों की चेतावनियों और संभावित जोखिमों पर आधारित हैं। इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं, बल्कि AI सुरक्षा को लेकर चल रही वैश्विक बहस के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।