Meta Pixel

वीडियोकॉन के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल धूत बैंकरप्ट घोषित, ₹12,668 करोड़ के कर्ज डिफॉल्ट पर NCLT का बड़ा फैसला

Spread the love

वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर और डायरेक्टर वेणुगोपाल नंदलाल धूत को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच ने बैंकरप्ट घोषित कर दिया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने यह आदेश जारी किया। धूत पर ब्याज और पेनल्टी सहित कुल 12,668 करोड़ रुपये के डिफॉल्ट का मामला है।

यह कार्रवाई उनकी पर्सनल इनसोल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया और कर्ज चुकाने के प्रस्ताव के असफल होने के बाद की गई है। विनय गोयल और चरणजीत सिंह गुलाटी की पीठ ने 5 नवंबर 2026 को इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत यह आदेश पारित किया।

SBI के लोन के लिए दी थी पर्सनल गारंटी

NCLT ने अपने आदेश में बताया कि SBI ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (VIL) को दिए गए बैंक लोन के मामले में वेणुगोपाल धूत के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। धूत इस कर्ज के लिए व्यक्तिगत गारंटर थे।

उन्होंने कंपनी को दी गई कई क्रेडिट सुविधाओं के बदले अपनी पर्सनल गारंटी दी थी। इनमें रुपया टर्म लोन, वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़ी क्रेडिट सुविधाएं और वर्किंग कैपिटल लोन शामिल थे।

बैंक ने फरवरी 2018 में इन व्यक्तिगत गारंटियों को इनवोक किया था। इसके बाद कर्ज की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।

क्या है वीडियोकॉन का इनसोल्वेंसी मामला?

वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज को जून 2018 में कॉर्पोरेट इनसोल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में शामिल किया गया था। बाद में इस प्रक्रिया को वीडियोकॉन ग्रुप की अन्य कंपनियों के साथ जोड़ दिया गया।

इसके बाद जून 2021 में NCLT ने ट्विन स्टार टेक्नोलॉजीज लिमिटेड की ओर से पेश किए गए रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी थी।

कंपनी की इनसोल्वेंसी प्रक्रिया के बाद भी उसके कर्ज से जुड़ी व्यक्तिगत गारंटी का मामला अलग से जारी रहा। इसी के तहत वेणुगोपाल धूत के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालियापन की कार्रवाई आगे बढ़ी।

₹600 करोड़ चुकाने का प्रस्ताव क्यों नहीं हुआ मंजूर?

वेणुगोपाल धूत की पर्सनल इनसोल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया अप्रैल 2026 में शुरू हुई थी। इस दौरान उन्होंने कर्जदाताओं के सामने एक रीपेमेंट प्लान पेश किया था।

इस प्रस्ताव के तहत धूत ने सिलीगुड़ी में प्रस्तावित डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के जरिए 36 महीने में 600 करोड़ रुपये चुकाने की पेशकश की थी।

हालांकि, कर्जदाताओं ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। NCLT ने भी पाया कि यह योजना भविष्य में प्रोजेक्ट के विकास, जरूरी मंजूरियों और संभावित कैश फ्लो पर निर्भर थी। इसमें तत्काल भुगतान का कोई प्रावधान नहीं था।

इसके अलावा, रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने बताया कि रीपेमेंट प्लान IBC के नियमों के तहत उनसे परामर्श करके तैयार नहीं किया गया था।

इन परिस्थितियों में कर्जदाताओं ने पर्सनल इनसोल्वेंसी प्रक्रिया समाप्त कर बैंकरप्सी की कार्रवाई शुरू करने का फैसला लिया। इससे पहले 17 जुलाई को NCLT ने रीपेमेंट प्लान खारिज करते हुए व्यक्तिगत इनसोल्वेंसी प्रक्रिया समाप्त कर दी थी।

₹12,668 करोड़ तक पहुंचा कुल डिफॉल्ट

इसके बाद SBI ने वेणुगोपाल धूत के खिलाफ बैंकरप्सी याचिका दाखिल की।

बैंक के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक ब्याज और पेनल्टी जोड़ने के बाद कुल डिफॉल्ट राशि 12,668 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।

दस्तावेजों की जांच के बाद NCLT ने माना कि बैंक की याचिका IBC की धारा 123 के तहत निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा करती है। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने याचिका स्वीकार करते हुए धूत को बैंकरप्ट घोषित कर दिया।

बैंकरप्सी ट्रस्टी नियुक्त, संपत्तियों पर अब उनका नियंत्रण

NCLT ने इस मामले में आशीष नारायण को बैंकरप्सी ट्रस्टी नियुक्त किया है। आदेश के बाद धूत की संपत्तियां निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ट्रस्टी के नियंत्रण में आ जाएंगी।

आदेश में आगे की प्रक्रिया के लिए ये निर्देश दिए गए हैं:

  • आशीष नारायण को बैंकरप्सी ट्रस्टी नियुक्त किया गया है।
  • धूत की संपत्तियां ट्रस्टी के नियंत्रण में रहेंगी और IBC के प्रावधानों के अनुसार उनका निपटान किया जाएगा।
  • धूत को सात दिनों के भीतर अपनी वित्तीय जानकारी ट्रस्टी को सौंपनी होगी।
  • ट्रस्टी को कर्जदाताओं को सूचित कर सार्वजनिक नोटिस जारी करना होगा।
  • लेनदारों से दावे आमंत्रित किए जाएंगे।
  • ट्रस्टी को 90 दिनों के भीतर NCLT और कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स के सामने शुरुआती रिपोर्ट पेश करनी होगी।

यह प्रक्रिया IBC की धारा 138 के तहत धूत के डिस्चार्ज होने तक जारी रहेगी।

क्या होती है बैंकरप्सी और पर्सनल गारंटी?

पर्सनल गारंटी: जब कोई व्यक्ति किसी कंपनी के लोन के बदले अपनी व्यक्तिगत गारंटी देता है, तो कंपनी के कर्ज नहीं चुकाने की स्थिति में बैंक उस गारंटर के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

बैंकरप्सी: जब कोई व्यक्ति अपना कर्ज चुकाने में असमर्थ होता है और उसके खिलाफ कानूनी दिवालियापन प्रक्रिया पूरी होती है, तो उसे बैंकरप्ट घोषित किया जा सकता है। इसके बाद उसकी संपत्तियों का प्रबंधन नियुक्त ट्रस्टी के माध्यम से किया जाता है और कानून के अनुसार कर्जदाताओं के दावों का निपटारा किया जाता है।

वेणुगोपाल धूत के मामले में NCLT का यह आदेश वीडियोकॉन समूह के कर्ज संकट से जुड़े एक बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। अब आगे की प्रक्रिया में उनकी संपत्तियों और कर्जदाताओं के दावों का निपटारा IBC के प्रावधानों के तहत किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *