Meta Pixel

भूटान में ग्लेशियर झील फटी, भारत में बाढ़ का अलर्ट! सड़कें बहीं, गर्म पानी का कुंड तबाह; बंगाल में 10 हजार से ज्यादा लोग शिफ्ट

Spread the love

Bhutan Glacier Lake Burst: पड़ोसी देश भूटान में ग्लेशियर झील से अचानक पानी निकलने के बाद भारी तबाही की खबर है। पानी के तेज बहाव ने गासा त्साचू के मशहूर प्राकृतिक गर्म पानी के कुंड के आसपास बने बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं और कुछ रास्तों पर आवाजाही रोकनी पड़ी। इस घटना के बाद भारत के पश्चिम बंगाल और असम के नदी किनारे बसे निचले इलाकों में संभावित बाढ़ को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।

30 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में 10 हजार से अधिक लोगों को एहतियातन सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया। राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है। शुरुआती रिपोर्टों में भूटान में किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है।

शिंताफू ग्लेशियर झील से निकला पानी, नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका

यह घटना भूटान के गासा जिले में स्थित शिंताफू ग्लेशियर झील से जुड़ी है। गुरुवार, 29 अक्टूबर की शाम झील से पानी का तेज बहाव शुरू होने की खबर सामने आई। यह झील वाकिला पर्वत के नीचे लुंगो और लाया क्षेत्र में स्थित है तथा भूटान की संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियर झीलों में शामिल है।

झील से निकला पानी मो छू नदी के जलग्रहण क्षेत्र में पहुंचा। इसके बाद पानी के पुनात्सांगछू और संकोश नदी तंत्र के जरिए भारत की ओर बढ़ने की आशंका पैदा हुई। इसी कारण नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई।

गासा त्साचू हॉट स्प्रिंग को भारी नुकसान

भूटान का गासा त्साचू प्राकृतिक गर्म पानी का कुंड पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। ग्लेशियर झील से आए तेज बहाव ने यहां बने बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया।

रिपोर्टों के अनुसार, लाया गांव की ओर जाने वाली सड़क का एक हिस्सा बह गया और कुछ पुलों के भी क्षतिग्रस्त या बह जाने की आशंका जताई गई। तेज बहाव और अंधेरा होने के कारण शुरुआती घंटों में नुकसान का पूरा आकलन नहीं हो सका। प्रभावित क्षेत्र में लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने से किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई।

भूटान से भारत तक कैसे पहुंच सकता है बाढ़ का पानी?

भूटान की नदियां भारत के पूर्वोत्तर और उत्तरी बंगाल के नदी तंत्र से जुड़ी हैं। शिंताफू झील से निकला पानी मो छू नदी के रास्ते आगे बढ़ सकता है। पुनात्सांगछू नदी तंत्र का पानी आगे संकोश नदी से जुड़ता है, जो भारत में प्रवेश करने के बाद असम और पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण नदी है।

पानी का तेज बहाव निचले इलाकों में अचानक जलस्तर बढ़ा सकता है। हालांकि, बाढ़ का वास्तविक प्रभाव पानी की मात्रा, नदी के मौजूदा जलस्तर और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए केवल झील फटने की घटना से हर इलाके में बाढ़ आने की पुष्टि नहीं की जा सकती।

बंगाल में 10 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया

संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में बड़े पैमाने पर एहतियाती कदम उठाए गए। संकोश नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों तथा राहत शिविरों में पहुंचाया गया।

रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 4,000 से 5,000 लोगों को राहत शिविरों में रखा गया, जबकि 6,000 से अधिक लोगों को अन्य सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। स्कूलों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी राहत केंद्र बनाए गए। वहां लोगों के लिए पीने के पानी, सूखे राशन और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की गई।

असम के धुबरी और कोकराझार में भी निगरानी

पश्चिम बंगाल के अलावा असम में भी संभावित प्रभाव को देखते हुए सतर्कता बढ़ाई गई। धुबरी और कोकराझार जिलों के संवेदनशील इलाकों में प्रशासन नदी के जलस्तर और पानी के बहाव पर नजर रख रहा है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों में स्थिति की निगरानी किए जाने की जानकारी दी। प्रशासन ने लोगों से आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और अफवाहों से बचने की अपील की है।

NDRF और SDRF की टीमें तैयार

संभावित बाढ़ से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन एजेंसियों को तैयार रखा गया है। पश्चिम बंगाल में SDRF और अन्य बचाव दलों की तैनाती की खबर है, जबकि NDRF की टीमों को भी सहायता के लिए भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

प्रशासन की प्राथमिकता नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लोगों को चेतावनी दी गई है कि वे नदी के किनारे जाने, तेज बहाव वाले पानी को पार करने या प्रशासन की सलाह के बिना जोखिम वाले इलाकों में लौटने से बचें।

फिलहाल क्या है स्थिति?

भूटान में ग्लेशियर झील से पानी निकलने के कारण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। भारत में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। शुरुआती रिपोर्टों में भूटान में किसी की मौत की सूचना नहीं है।

लोगों के लिए जरूरी सलाह: यदि आप प्रभावित नदी क्षेत्रों में रहते हैं, तो स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान दें। जलस्तर बढ़ने, सायरन बजने या सुरक्षित स्थान पर जाने का निर्देश मिलने पर तुरंत उसका पालन करें। बाढ़ की स्थिति में बिजली के खंभों, पुलों और तेज बहाव वाले पानी से दूर रहें।

भूटान में सड़कों पर मलबा आया, सिंचाई सिस्टम बहा, 5 फोटो…

1. सोलर सिंचाई सिस्टम प्रभावित

पुनाखा जिले में लगा सोलर इरिगेशन लिफ्टिंग सिस्टम क्षतिग्रस्त हुआ। यह सिस्टम काम करना बंद कर चुका है।

पुनाखा जिले में लगा सोलर इरिगेशन लिफ्टिंग सिस्टम क्षतिग्रस्त हुआ। यह सिस्टम काम करना बंद कर चुका है।

2. गांवों में बाढ़ का पानी घुसा

शिंगचाला नदी में बाढ़ के बाद पानी गांवों में घुस गया।

शिंगचाला नदी में बाढ़ के बाद पानी गांवों में घुस गया।

3. हाईवे पर पेड़ बहकर आए, मलबा जमा

पुनाखा-गासा हाईवे पर पानी के साथ पेड़ भी बहकर आ गए। द्जोमलिंगथांग इलाके में सड़क पर मलबा जमा हो गया।

पुनाखा-गासा हाईवे पर पानी के साथ पेड़ भी बहकर आ गए। द्जोमलिंगथांग इलाके में सड़क पर मलबा जमा हो गया।

4. सड़कें बहीं, मलबा आया

लाया गांव की ओर जाने वाली सड़क का एक हिस्सा पानी के तेज बहाव में बह गया। इस रास्ते पर आवाजाही रोक दी गई।

लाया गांव की ओर जाने वाली सड़क का एक हिस्सा पानी के तेज बहाव में बह गया। इस रास्ते पर आवाजाही रोक दी गई।

5. हॉट स्प्रिंग को नुकसान

गासा त्साचू के आसपास बने इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुईं।

गासा त्साचू के आसपास बने इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुईं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *