नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा या कीमतों में और गिरावट का इंतजार करना चाहिए?
जनवरी 2026 में बनी रिकॉर्ड ऊंचाई से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 24.6% नीचे आ चुका है। हालांकि, गिरावट के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में सोने की कीमतों में दोबारा तेजी आ सकती है।
मिराए एसेट म्यूचुअल फंड की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा गिरावट का मुख्य कारण सोने की मांग में कमजोरी नहीं, बल्कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोने पर दबाव
जब अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है तो निवेशकों के लिए बॉन्ड अपेक्षाकृत आकर्षक हो जाते हैं। ऐसे माहौल में कुछ निवेशक सोने से पैसा निकालकर बॉन्ड जैसे एसेट में निवेश कर सकते हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी के आंकड़ों के मुताबिक, 6 अक्टूबर को 10 साल के अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड 5.27% थी।
इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव भी सोने की कीमतों को प्रभावित कर रहा है।
4,200 डॉलर से नीचे सोना खरीदने का मौका?
मिराए एसेट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,200 डॉलर प्रति औंस से नीचे आने पर निवेशकों के लिए खरीदारी का अवसर बन सकता है।
6 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 4,168 डॉलर प्रति औंस दर्ज की गई थी।
हालांकि, फंड हाउस ने यह भी चेतावनी दी है कि कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसलिए मौजूदा गिरावट को यह संकेत नहीं माना जाना चाहिए कि सोना तुरंत फिर तेजी की राह पकड़ लेगा।
केंद्रीय बैंक लगातार क्यों खरीद रहे हैं सोना?
सोने के लिए लंबी अवधि में सबसे बड़ा सपोर्ट केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से मिल रहा है।
दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।
मिराए एसेट का अनुमान है कि केंद्रीय बैंकों की सालाना सोने की मांग करीब 700 टन रह सकती है। यह 2010 से 2021 के दौरान रहे लगभग 470 टन के औसत स्तर से काफी ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 89% केंद्रीय बैंकों को वैश्विक सोने के भंडार में आगे बढ़ोतरी की उम्मीद है, जबकि करीब 45% केंद्रीय बैंक अपने भंडार में सोने की मात्रा बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
दिवाली और शादी के सीजन से भारत में बढ़ सकती है मांग
भारत में सोने की खरीदारी के लिहाज से त्योहारी और शादी का सीजन बेहद महत्वपूर्ण होता है।
नवरात्र, दशहरा, दिवाली और शादी के सीजन में ज्वेलरी की मांग बढ़ सकती है। इससे घरेलू बाजार में सोने की मांग को सहारा मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा दुनिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार विवाद और कई देशों की डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिशें भी लंबे समय में सोने की मांग को मजबूत कर सकती हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
मिराए एसेट के मुताबिक, निकट अवधि में अमेरिकी ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड के कारण सोने में वोलैटिलिटी यानी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
वहीं, लंबी अवधि में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, वैश्विक अनिश्चितता और महंगाई से बचाव के लिए सोने की मांग मजबूत रहने की संभावना है।
इसलिए निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट को एकमुश्त बड़ी खरीदारी के बजाय चरणबद्ध निवेश के नजरिए से देखना ज्यादा उचित हो सकता है। हालांकि, निवेश का फैसला अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और पूरे पोर्टफोलियो को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए।
नोट: यह खबर निवेश सलाह नहीं है। सोने में निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को जरूर समझें।