Gold Silver ETF: सोने और चांदी की कीमतों में लंबे समय से जारी तेजी के बाद अब निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है। शुक्रवार, 11 सितंबर को शेयर बाजार में सिल्वर ETF पर खासा दबाव देखने को मिला। दोपहर 3 बजे तक प्रमुख सिल्वर ETF में करीब 3% या उससे अधिक की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर गोल्ड ETF में भी बिकवाली रही, लेकिन इसमें गिरावट चांदी के मुकाबले सीमित रही।
Silver ETF में 3% से ज्यादा की गिरावट
शुक्रवार के कारोबार में मिराए एसेट सिल्वर ETF सबसे ज्यादा दबाव में रहा। यह 3.17% टूटकर ₹220.70 पर आ गया।
इसके अलावा:
- SBI Silver ETF: 3.11% गिरकर ₹222.02
- HDFC Silver ETF: 3.09% नीचे
- Nippon India Silver ETF: 2.96% गिरकर ₹226.58
- Silver iETF: 2.95% की गिरावट
यानी हाल की तेज तेजी के बाद चांदी से जुड़े ETF में निवेशकों की बिकवाली अपेक्षाकृत ज्यादा आक्रामक रही।
Gold ETF में भी दिखी बिकवाली
गोल्ड ETF में गिरावट चांदी से कम रही, लेकिन यहां भी निवेशकों ने मुनाफा निकालने में दिलचस्पी दिखाई।
- Choice Gold ETF: 1.28% गिरकर ₹149.89
- 360 ONE Gold ETF: 1.04% टूटकर ₹147.60
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने और चांदी में हाल की तेजी के बाद कुछ निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली की है।
क्या गोल्ड-सिल्वर की तेजी खत्म हो गई?
जानकारों का मानना है कि मौजूदा गिरावट को फिलहाल सोने-चांदी की लंबी अवधि की तेजी खत्म होने के संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। तेज बढ़त के बाद बाजार में प्रॉफिट बुकिंग और करेक्शन सामान्य प्रक्रिया है।
बोनांजा के वरिष्ठ शोध विश्लेषक निरपेंद्र यादव के मुताबिक, निचले स्तरों पर ETF खरीदने वाले निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली स्वाभाविक है। उनके अनुसार, हाल के दौर में चांदी की तेजी सोने के मुकाबले ज्यादा तेज रही है और इसमें सट्टेबाजी का असर भी अधिक रहा, इसलिए गिरावट भी अपेक्षाकृत तेज दिखाई दे रही है।
महंगा तेल, बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर ने बढ़ाया दबाव
सोने और चांदी पर दबाव बढ़ने के पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारण बताए जा रहे हैं।
1. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
मध्य-पूर्व, अमेरिका-ईरान तनाव और लाल सागर से जुड़ी सप्लाई चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने की दिशा में बढ़ा।
महंगे कच्चे तेल से महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत होती है। इससे केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों पर भी असर पड़ता है।
2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
अमेरिकी 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड करीब 5% तक पहुंचने की ओर है। बॉन्ड से मिलने वाला आकर्षक ब्याज निवेशकों को ऐसे विकल्पों की तरफ खींच सकता है, जबकि सोना और चांदी खुद कोई ब्याज नहीं देते।
ऐसे माहौल में कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ सकता है।
3. डॉलर हुआ मजबूत
अमेरिकी डॉलर में भी मजबूती आई है। डॉलर इंडेक्स करीब 99 के स्तर तक पहुंच गया, जो लगभग एक सप्ताह का मजबूत स्तर है।
आमतौर पर मजबूत डॉलर का असर सोने और चांदी की कीमतों पर नकारात्मक पड़ता है, क्योंकि इनकी अंतरराष्ट्रीय कीमत डॉलर में तय होती है।
4. चांदी में ज्यादा उतार-चढ़ाव
चांदी की खासियत यह है कि इसका इस्तेमाल केवल निवेश के लिए नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर होता है। हाल की तेज तेजी के बाद इसमें प्रॉफिट बुकिंग का असर सोने की तुलना में ज्यादा दिखाई दे सकता है।
इसके अलावा चांदी का बाजार सोने की तुलना में छोटा और अपेक्षाकृत कम लिक्विड है। इसलिए इसमें कीमतों का उतार-चढ़ाव भी ज्यादा तेज हो सकता है।
फिलहाल इसे करेक्शन के तौर पर देख रहे एक्सपर्ट
बाजार में मौजूदा कमजोरी के बावजूद जानकार इसे फिलहाल तेजी के बाद आया करेक्शन मान रहे हैं। हाल की रैली के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफा निकालना, महंगा कच्चा तेल, ऊंची बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर ने गिरावट को बढ़ाने का काम किया है।
हालांकि, आगे सोने और चांदी की दिशा ब्याज दरों, डॉलर, वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और औद्योगिक मांग जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।
निवेश संबंधी सावधानी: Gold ETF और Silver ETF में निवेश बाजार जोखिम के अधीन है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और योग्य वित्तीय सलाहकार की सलाह को ध्यान में रखें।