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दिव्यांगजनों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस: सरकारी योजना में ₹1 लाख तक का कवर, जानें पात्रता और नियम

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बिजनेस डेस्क। अचानक बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में इलाज का खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ सकता है। दिव्यांगजनों और उनके परिवारों के लिए यह चुनौती और बड़ी हो सकती है, क्योंकि नियमित दवाइयों, जांच और थेरेपी पर भी लगातार खर्च होता है। ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस आर्थिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है।

दिव्यांगजनों के लिए निजी बीमा कंपनियों की पॉलिसियों के अलावा सरकार से जुड़ी निरामया हेल्थ इंश्योरेंस योजना भी उपलब्ध है, जिसमें पात्र लाभार्थियों को सालाना ₹1 लाख तक का स्वास्थ्य कवर मिल सकता है।

दिव्यांगजनों के लिए कौन-कौन से बीमा विकल्प हैं?

भारत में दिव्यांगजनों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने के उद्देश्य से अलग-अलग बीमा विकल्प मौजूद हैं। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों को मान्यता दी गई है।

कुछ बीमा कंपनियां दिव्यांगजनों और HIV/AIDS से प्रभावित लोगों के लिए विशेष स्वास्थ्य बीमा योजनाएं भी उपलब्ध कराती हैं। हालांकि, हर पॉलिसी के नियम और कवरेज अलग हो सकते हैं।

अस्पताल से लेकर दवाइयों तक मिल सकता है कवरेज

पॉलिसी के अनुसार अस्पताल में भर्ती होने का खर्च, कमरे का किराया, ICU, डॉक्टर की फीस, दवाइयां, जांच और सर्जरी जैसी सुविधाएं कवर हो सकती हैं।

कुछ योजनाओं में अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्च, एंबुलेंस, आयुष उपचार और मोतियाबिंद सर्जरी जैसी सुविधाएं भी शामिल हो सकती हैं। कुछ पॉलिसियों में रोबोटिक सर्जरी या स्टेम सेल जैसी आधुनिक चिकित्सा प्रक्रियाओं का कवरेज भी शर्तों के आधार पर मिल सकता है।

किन खर्चों पर नहीं मिलता क्लेम?

हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय सिर्फ प्रीमियम देखना पर्याप्त नहीं है। वेटिंग पीरियड और exclusions यानी किन उपचारों पर बीमा नहीं मिलेगा, इसे समझना बेहद जरूरी है।

पहले से मौजूद बीमारियों के लिए पॉलिसी में निर्धारित वेटिंग पीरियड हो सकता है। कई पॉलिसियों में यह अवधि 24 से 36 महीने तक हो सकती है। कुछ बीमारियों के लिए अलग वेटिंग पीरियड भी लागू हो सकता है।

इसके अलावा शुरुआती 30 दिनों में होने वाले सामान्य उपचार पर भी कई पॉलिसियों में प्रतिबंध रहता है। हालांकि, दुर्घटना से जुड़े इलाज को अलग नियमों के तहत कवर किया जा सकता है।

कॉस्मेटिक सर्जरी, मोटापे का उपचार, बांझपन और गर्भावस्था से जुड़े खर्च कई पॉलिसियों में कवर नहीं किए जाते। इसलिए पॉलिसी लेने से पहले exclusions की पूरी सूची जरूर पढ़ें।

निरामया योजना में ₹1 लाख तक का कवर

दिव्यांगजनों के लिए सरकारी विकल्पों में निरामया हेल्थ इंश्योरेंस योजना महत्वपूर्ण है। यह योजना ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, बौद्धिक दिव्यांगता और एक से अधिक दिव्यांगता वाले पात्र व्यक्तियों के लिए है।

योजना के तहत सालाना ₹1 लाख तक का कवर उपलब्ध है और इसका हर साल नवीनीकरण कराना होता है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार कवर में अस्पताल में भर्ती के लिए ₹55 हजार तक, OPD उपचार के लिए ₹19 हजार तक और नियमित थेरेपी के लिए ₹20 हजार तक का प्रावधान है। इसके अलावा आयुष उपचार के लिए ₹4 हजार और इलाज से जुड़े आने-जाने के खर्च के लिए ₹2 हजार तक का प्रावधान बताया गया है।

बीमा लेने के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत?

विशेष बीमा योजना या सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए पात्रता के अनुसार वैध दिव्यांगता प्रमाणपत्र जरूरी हो सकता है। निरामया योजना में नेशनल ट्रस्ट के निर्धारित पात्रता नियम लागू होते हैं।

वहीं, निजी हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, प्रीमियम, कवरेज लिमिट और पॉलिसी की शर्तों को ध्यान से देखना चाहिए।

सबसे जरूरी बात: कोई भी हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले यह जरूर जांचें कि कौन-सी बीमारी और उपचार कवर हैं, वेटिंग पीरियड कितना है, कितना खर्च बीमा कंपनी देगी और किन परिस्थितियों में क्लेम खारिज हो सकता है। इससे बाद में इलाज के समय आर्थिक परेशानी से बचा जा सकता है।

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