नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को लेकर आज दिल्ली में अहम चर्चा होने जा रही है। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के शामिल होने की जानकारी है। बैठक में दोनों राज्यों के बीच महानदी के जल बंटवारे और नदी बेसिन के बेहतर प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।
महानदी को लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद कई वर्षों से चला आ रहा है। केंद्र सरकार की ओर से इस मामले में दोनों राज्यों के बीच संवाद और तकनीकी स्तर पर सहमति बनाने की कोशिशें लगातार जारी हैं।
2018 में गठित हुआ था महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण
ओडिशा की मांग के बाद केंद्र सरकार ने 12 मार्च 2018 को अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया था। विवाद मुख्य रूप से महानदी के ऊपरी हिस्से में छत्तीसगढ़ की जल परियोजनाओं और बैराजों से संबंधित है।
ओडिशा की ओर से यह मुद्दा उठाया जाता रहा है कि कम पानी वाले मौसम में ऊपरी हिस्से की परियोजनाओं का नदी के डाउनस्ट्रीम प्रवाह पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं छत्तीसगढ़ अपने हिस्से में जल संसाधनों के इस्तेमाल और परियोजनाओं को लेकर अपना पक्ष रखता रहा है।
जुलाई में भी हुई थी दोनों राज्यों के CM की बैठक
30 जुलाई 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई थी। इसमें दोनों राज्यों के बीच संवाद, तकनीकी सहयोग और सहमति के जरिए विवाद सुलझाने पर चर्चा हुई थी।
केंद्र सरकार के मुताबिक, दोनों राज्यों के अधिकारी तकनीकी मुद्दों पर भी बातचीत कर रहे हैं और संयुक्त तकनीकी समिति कई विषयों पर सहमति बनाने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है।
साय और माझी के बीच पहले भी हो चुकी है बातचीत
महानदी विवाद को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के बीच पहले भी चर्चा हो चुकी है। दोनों राज्यों के बीच संवाद के जरिए समाधान तलाशने की कोशिशों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
बाढ़ और जल प्रबंधन भी चर्चा का हिस्सा
महानदी सिर्फ जल बंटवारे का मुद्दा नहीं है। नदी बेसिन में भारी बारिश के दौरान बाढ़ प्रबंधन और पानी के प्रभावी उपयोग का विषय भी दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में भविष्य के लिए जल प्रबंधन की साझा रणनीति पर भी चर्चा अहम हो सकती है।
केंद्र की ओर से जुलाई की बैठक में महानदी को दोनों राज्यों के लाखों लोगों के लिए महत्वपूर्ण नदी बताते हुए दीर्घकालिक, समान और टिकाऊ जल प्रबंधन व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया गया था।
क्यों महत्वपूर्ण है महानदी विवाद का समाधान?
महानदी का पानी दोनों राज्यों के कृषि, सिंचाई, उद्योग और अन्य जरूरतों से जुड़ा है। इसलिए जल बंटवारे को लेकर किसी भी सहमति का असर केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों राज्यों की जल नीति और विकास योजनाओं पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल नजर इस बात पर है कि दिल्ली में होने वाली बातचीत से दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने की दिशा में कोई ठोस प्रगति होती है या नहीं।